लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनेंगी ममता बनर्जी, जानें- उनसे जुड़ी हुईं खास बातें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल फोटो

66 साल की ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। ममता ने 20 मई 2011 को पहली और 27 मई 2016 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। आज 216 सीटों की बढ़त के साथ एक बार फिर सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया।

नई दिल्ली/कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने वाली हैं। 66 साल की ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। ममता ने 20 मई 2011 को पहली और 27 मई 2016 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वहीं, आज यानी 2 मई को आए नतीजों में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस 216 सीटों पर आगे चल रही हैं। पार्टी की बंपर जीत के साथ ही वह एक बार फिर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने वाली हैं।

ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने अपना करियर कांग्रेस से शुरू किया था। कांग्रेस से सियासी सफर की शुरुआत करने वाली ममता की गिनती कभी कांग्रेस में राजीव गांधी के भरोसेमंद नेताओं में होती थी, लेकिन फिर पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व से दूर‍ियां ऐसी बढ़ी कि अपनी अलग पार्टी का गठन कर लिया और 13 साल के भीतर इसे उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जिसे हासिल करने में पार्टियों को अमूमन कई साल लग जाते हैं।

1970 के दशक में राजनीतिक करियर की हुई शुरुआत

कांग्रेस की स्टूडेंट इकाई से 1970 के दशक में राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली ममता जल्‍द ही पार्टी की तेज-तर्रार नेताओं में शुमार हो गईं। हालांकि 1998 में उन्‍होंने अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा फैसला लिया और कांग्रेस से अलग हो गईं। ममता ने अपनी अलग पार्टी का गठन किया। इस पार्टी का नाम उन्होंने तृणमूल कांग्रेस रखा। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे से लड़ाई के बाद ममता ने पार्टी को जन आंदोलन से खड़ा किया।

सफेद सूती साड़ी और हवाई चप्पल से आज भी उनका नाता

ममता बनर्जी के व्‍यक्तित्‍व की बात करें तो सियासत में सीढी दर सीढ़ी सफलता हासिल करने के बाद भी सादगी हमेशा उनके जीवन का हिस्‍सा रही। चाहे वह सांसद रही हों या केंद्र में मंत्री या फिर बंगाल की मुख्यमंत्री, उनके पहनावे या रहन-सहन में कोई फर्क नहीं आया। सफेद सूती साड़ी और हवाई चप्पल से आज भी उनका नाता बरकरार है। उनकी पहचान हमेशा जमीन से जुड़ी एक नेता के तौर पर रही है। चाहे सिंगुर में किसानों के समर्थन में धरना और आमरण अनशन का मसला हो या नंदीग्राम में पुलिस की गोलियों के शिकार लोगों के लिए लड़ाई, ममता हमेशा मोर्चे पर आगे खड़ी रहीं।