उत्तराखंड में छिपा है ओलंपियन सुशील कुमार, अंतरराष्ट्रीय पहलवान सागर धनखड़ की हत्या में है आरोपित

 


Haryana Wrestlers Murder Case: उत्तराखंड में छिपा है ओलंपियन सुशील कुमार, अंतरराष्ट्रीय पहलवान सागर धनखड़ की हत्या में है आरोपित

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में मंगलवार रात अंतरराष्ट्रीय पहलवान सागर धनखड़ की हत्या कर दी गई थी। वारदात को करीब 20 लोगों ने अंजाम दिया था। इस मामले में पहलवान सुशील कुमार व उसके करीबियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

नई दिल्ली, हरियाणा के रोहतक के पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड में पुलिस ने ओलंपियन सुशील कुमार पर अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हालांकि, पुलिस की छापेमारी शुरू होते ही सुशील के भागकर उत्तराखंड में छिपने की जानकारी पुलिस को मिली है। ऐसे में पुलिस की चार टीमें सुशील और उसके करीबी अजय, मोहित व डोली की तलाश में जुट गई हैं और इसके लिए उत्तराखंड पुलिस से भी सहयोग ले रही हैं। मालूम हो कि दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में मंगलवार देर रात उभरते हुए अंतरराष्ट्रीय पहलवान सागर धनखड़ की हत्या कर दी गई थी। इस वारदात को करीब 20 लोगों ने अंजाम दिया था। इस मामले में पहलवान सुशील कुमार व उसके करीबियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि सुशील व अन्य आरोपितों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। छत्रसाल में लगे सीसीटीवी फुटेज, गिरफ्तार किए गए आरोपित प्रिंस दलाल और घायल पहलवान अमित व सोनू से पूछताछ के बाद 10 आरोपितों की ही पहचान हो पाई है।इस बीच सुशील के मोबाइल की लोकेशन उत्तराखंड में मिली है। सूत्रों के मुताबिक पहचाने गए अन्य आरोपितों में सुशील का दाहिना हाथ अजय, मोहित और डाली आदि शामिल हैं। मूल रूप से रोहतक के बखेता गांव निवासी सागर धनखड़ उभरते हुए पहलवान थे और दो-तीन बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग ले चुके थे। उनके पिता दिल्ली पुलिस में हवलदार हैं और बेगमपुरा थाने में उनकी तैनाती है।

गैंगस्टरों से है सुशील की साठगांठ

पिछले कई सालों से सुशील कुमार की सुंदर भाटी, काला जठेड़ी व लारेंस बिश्नोई जैसे बड़े गैंगेस्टर से साठगांठ है। इसके चलते सुशील ने कई साल पहले आइटीओ स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में पहलवान प्रवीण राना की बुरी तरह से पिटाई की थी। इस मामले में सुशील सहित उसके साथी पहलवानों के खिलाफ आइपी एस्टेट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। उक्त मामले में भी पुलिस ने सुशील को गिरफ्तार नहीं किया था। पुलिस के मुताबिक कुछ साल पहले सुशील ने दिल्ली के अधिकतर टोल का ठेका लिया है, जहां टोल वसूली की जिम्मेदारी उसने गैंगस्टर को सौंपी थी।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं सवाल

सागर की हत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है। माडल टाउन थाना पुलिस ने पीसीआर काल के आधार थाने में दर्ज डीडी एंट्री पर मुकदमा दर्ज किया है। सागर के स्वजन का आरोप है कि इससे आरोपितों को फायदा मिल सकता है। मंगलवार देर रात 1.19 बजे पुलिस को पीसीआर काल मिली थी कि छत्रसाल स्टेडियम में गोलियां चल रही हैं। एफआइआर में बताया गया है कि पुलिस जब मौके पर पहुंची तब वहां कोई चश्मदीद नहीं मिला। घायल सागर, अमित और सोनू के अस्पताल में होने को सूचना मिली।

सवाल उठता है कि जब तीन घायल अस्पताल में भर्ती थे तब पुलिस ने अस्पताल जाकर तीनों के बयान लेकर उस आधार पर मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया। छत्रसाल स्टेडियम से सिविल लाइन स्थित सुश्रुत ट्रामा सेंटर पहुचने में पुलिस को 20 मिनट का समय लगता, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। पुलिस चाहती तो अगले दिन सुबह ही घायलों का बयान दर्ज कर सकती थी। लेकिन डीडी एंटी के आधार पर सात घंटे बाद मुकदमा दर्ज किया गया। सागर के निधन से पहले उनका बयान दर्ज कर लिया जाता तो यह आरोपितों के खिलाफ मजबूत सुबूत होता। स्वजन का आरोप है कि पुलिस ने सुशील को बचाने के लिए ऐसा किया है।