अमेरिका ने की थी यूरोपीय देशों के नेताओं की जासूसी, डेनमार्क की मीडिया रिपोर्ट से पश्चिमी देशों में खलबली

 

डेनमार्क की एक मीडिया रिपोर्ट में अमेरिका और डेनमार्क पर बड़ा आरोप लगाया गया है।

डेनमार्क की एक मीडिया रिपोर्ट में अमेरिका और डेनमार्क पर बड़ा आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डेनमार्क की डिफेंस इंटेलीजेंस सर्विस ने अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) को ओपन इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध कराया था।

कोपेनहेगेन, एजेंसियां। डेनमार्क की एक मीडिया रिपोर्ट में अमेरिका और डेनमार्क पर बड़ा आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डेनमार्क की डिफेंस इंटेलीजेंस सर्विस ने अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) को ओपन इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध कराया था। अमेरिका ने इसको जर्मनी, फ्रांस, नार्वे और स्वीडन के राजनेताओं और अधिकारियों की जासूसी के लिए इस्तेमाल किया। जिन लोगों की जासूसी गई, उस सूची में जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल का भी नाम है।

मीडिया रिपोर्ट रविवार को डेनमार्क के डीआर न्यूज में आई है। डीआर ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में स्वीडन, नार्वे, जर्मनी और फ्रांस की मीडिया का सहयोग लिया, जिसे आपरेशन डनहैमर का नाम दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार 2012 से 2014 तक के बीच यह जासूसी की गई थी। इसके लिए डेनमार्क की इनफोर्मेशन केबिल का इस्तेमाल किया गया।

इस संबंध में जर्मन चांसलर के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें आरोपों के बारे में पता चला है, लेकिन वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्राइन ब्रेमसेन ने भी इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका के एनएसए ने जासूसी करने के लिए अपने विकसित किए गए एक्सकीस्कोर साफ्टवेयर के माध्यम से पड़ोसी देशों के राजनेताओं और अधिकारियों के फोन से कॉल, मैसेज और चैट संदेशों को इंटरसेप्ट किया था।