कोरोना काल में जिस ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा है, आइए जानें, कब और कहां हुई इसकी उत्पत्ति

 


पहाड़ियों में मिलते हैं स्ट्रोमेटोलाइट जीवाश्म जिससे वायुमंडल में पैदा हुई ऑक्सीजन,

उदयपुर के झामरकोटड़ा की पहाड़ियों में मिलते हैं स्ट्रोमेटोलाइट जीवाश्म जिससे वायुमंडल में पैदा हुई ऑक्सीजन शोध के अनुसार 250 करोड़ साल पहले हुई थी उत्पत्ति यहां जीवाश्म पार्क एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा। दुनिया के पर्यटक भू वैज्ञानिकों शोधार्थियों को जीवाश्म चट्टानों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

उदयपुर। कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि ऑक्सीजन की उत्पत्ति कब और कहां से शुरू हुई। भारत में ऑक्सीजन की उत्तपत्ति सबसे पहले राजस्थान और उदयपुर की अरावली पर्वत श्रृंखला से शुरू हुई। उदयपुर जिले की झामरकोटड़ा में राजस्थान की सबसे प्राचीनतम अरावली पर्वत श्रृंखला है, जिसका निर्माण 330 करोड़ साल पूर्व हुआ था। यहीं स्ट्रोमेटोलाइट जीवाश्म पैदा हुए और वायुमंडल में ऑक्सीजन की उत्पत्ति शुरू हुई।

भू-विज्ञानी शोध के आधार पर बताते हैं कि यह जानकर सुनकर आपको वाकई हैरानी होगी कि जिस ऑक्सीजन को ग्रहण करके हम श्वास ले रहे हैं, उसकी पृथ्वी पर उत्पत्ति 210 से 250 करोड़ साल पहले हुई थी। यानी कि वायुमंडल में ऑक्सीजन के आने के बाद लगभग 200 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर सूक्ष्म जीवों का अस्तित्व हुआ। अरावली पर्वत श्रृंखला पर जीवाश्मों की खोज के लिए जर्मनी के म्यूनिख स्थित लुडविंग युनिवरसिटी उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के साथ एक दशक से शोध में जुटा है। अभी तक हुए खोज से यह पता चला कि अरावली पर्वत श्रृंखला कभी अथाह समुद्र था।आइसोटॉप स्टेडी में से पता चला है कि अरावली पर्वत श्रृंखला की चट्टानों का निर्माण एक समय में नहीं हुआ। जोधपुर क्षेत्र की चट्टानें 75 से 60 करोड़ साल पहले, जयपुर क्षेत्र की चट्टानें 150 से 100 करोड़ साल पहले जबकि उदयपुर-सिरोही क्षेत्र की चट्टानें 330 करोड़ से 150 करोड़ साल पहले बनीं। जहां भी विशाल चट्टानेें हैं, वहां कभी अथाह समुद्र हुआ करता था। लेकिन भूगर्भीय परिवर्तनों से अरावली के रूप में हमें अनमोल विरासत मिली है।

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के पूर्व भूगर्भ विज्ञानी प्रो. पुष्पेंद्रसिंह राणावत ने बताया कि करोड़ों साल पहले वातावरण में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा अधिक थी। अरावली पर्वत श्रृंखला से पहले बने यहां अथाह समुद्र के उथले पानी में पहली बार स्ट्रोमेटोलाइट जीवाश्म पैदा हुए। जो कार्बन डाइ ऑक्साइड को अवशोषित करते थे। इन्हीं स्ट्रोमेटोलाइट से ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती गई और जीवन की उत्पत्ति हुई। उदयपुर के झामरकोटड़ा में 160 करोड़ पुरानी रैंज में स्ट्रोमेटोलाइट जीवश्म और ऑक्सीजन की उत्पत्ति हुई। महाराजा कॉलेज जयपुर के पूर्व प्राचार्य सांइटिस्ट प्रो. एमके पंडित भी इस पर शोध कर रहे हैं। एक और भूविज्ञानी प्रो. विनोद बताते हैं कि झामरकोटड़ा की चट्टानों में एक सौ अस्सी करोड़ साले पुराने हरित शैवाल के जीवाश्म मौजूद हैं।

चित्तौड़गढ़ में बनेगा जीवाश्म पार्क

चित्तौड़गढ़ के बोजुंदा में अस्सी करोड़ साल पहले समुद्र और जीव उत्पत्ति के साक्ष्य मौजूद हैं। अब वहां 12 एकड़ भूमि पर जीवाश्म पार्क विकसित किया जाएगा। इसको लेकर चित्तौड़गढ़ के जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा, भूगर्भ विज्ञानी प्रो. पुष्पेंद्र सिंह राणावत एवं क्षेत्रीय तहसीलदार विपिन चौधरी, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक ओमप्रकाश जांगिड़, खनिज अधिकारी रवि प्रकाश मीणा, यूआईटी सचिव सीडी चारण आदि ने बोजुंदा का दौरा किया। यहां जीवाश्म पार्क एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा। जहां देश-दुनिया के पर्यटक, भू - वैज्ञानिकों, नव शोधार्थियों को जीवाश्म चट्टानों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।