गुजरात के मोरवा हड़फ उपचुनाव में भाजपा की निमिषा सुथार की जीत

गुजरात की मोरवा हड़फ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की निमिषा सुथार आगे। फाइल फोटो
मोरवा हड़फ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निमिषा सुथार ने रविवार को जीत हासिल की है। निमिषा ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश कटारा को 45649 मतों से हराया है।

अहमदाबाद,  संवाददाता।  गुजरात की मोरवा हड़फ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निमिषा सुथार ने रविवार को जीत हासिल की है। निमिषा ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश कटारा को 45,649 मतों से हराया है। 17 अप्रैल को हुए में उपचुनाव में कुल 93,179 मतों में से सुथार ने 67,457 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश कटारा को 21,808 वोट मिले। यह जानकारी पंचमहल कलेक्टर अमित अरोड़ा ने दी। उनके मुताबिक, एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार सुशीलाबेन मेडा को 2,371 वोट मिले हैं। कुल 1,527 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था, जबकि 16 वोट अवैध घोषित किए गए थे।

पूर्व विधायक भूपेंद्र सिंह खांट के निधन के चलते हैं यह सीट खाली हुई थी। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने भाजपा की निमिषा सुथार के अनुसूचित जन जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाया था। कांग्रेस का यह कहना था कि जिस आधार पर पूर्व विधायक खाट के जाति प्रमाण पत्र को खारिज करते हुए उन्हें विधानसभा की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था, उसी आधार पर निमिषा का नामांकन भी खारिज किया जाना चाहिए। हालांकि चुनाव आयोग ने कांग्रेस की इस शिकायत पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। गुजरात में पंचमहल जिले के मोरवा हड़फ विधानसभा उपचुनाव में 329 मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ था। अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित विधानसभा सीट मोरवा हड़फ के लिए उपचुनाव की आवश्यकता थी, क्योंकि निर्दलीय विधायक भूपेंद्र सिंह खांट को मई, 2019 में अयोग्य जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। उन्होंने इस मुद्दे पर गुजरात उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की है। इस साल जनवरी में खांट का निधन हो गया। कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। सत्तारूढ़ भाजपा ने पूर्व विधायक निमिषा सुथार को मैदान में उतारा था, उन्होंने 2013 से 2017 तक इस सीट पर अपने उम्मीदवार के रूप में प्रतिनिधित्व किया। सुथार कांग्रेस के सुरेश कटारा के खिलाफ चुनाव लड़े। एक अन्य उम्मीदवार सुशीलाबेन मेडा निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा।

इस सीट पर निर्दलीय चुनाव जीतने वाले भूपेंद्र सिंह खांट के निधन के चलते उपचुनाव हुआ है। नवंबर, 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद भूपेंद्र सिंह के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति के चलते की विधानसभा की उनकी सदस्यता निलंबित कर दी गई थी। विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी के इस फैसले को तत्कालीन विधायक खांट ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत व गुजरात उच्च न्यायालय में भी चुनौती दी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। मोरवा हड़फ सीट आदिवासी बहुल पंचमहल जिले में आती है तथा यह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। भूपेंद्र खाट के पिता ओबीसी समाज से आते हैं, लेकिन उनकी माता आदिवासी थी। उनके जन्म के बाद माता अपने पीहर चली गईं और उनके साथ भूपेंद्र खांट अपने ननिहाल में ही रहे तथा वहां ही उनकी प्राथमिक शिक्षा हुई। केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, ननिहाल में रहकर शिक्षा पाने वाले बच्चों को उसकी माता के समुदाय का मान कर उसका प्रमाण पत्र बनाया जाता है तथा उसी आधार पर भूपेंद्र ने चुनाव लड़ा था।