कोरोना के गंभीर रोगियों में सामने आ रही ये समस्या, इस कारण अधिक हो रही मृत्यु

Coronavirus Symptoms, Coronavirus Update, Ranchi Jharkhand News इस बार वायरस फेफड़े को बहुत तेजी से डैमेज कर रहा है।

कोरोना मरीज दो से तीन दिनों में ही ऑक्सीजन सपोर्ट पर पहुंच जा रहे हैं। डी डायमर टेस्ट से खून में थक्का जमने की पहचान होती है। इस बार वायरस फेफड़े को बहुत तेजी से डैमेज कर रहा है।

रांची, राज्य ब्यूरो।  कोरोना वायरस महामारी के जैसे-जैसे नए रूप सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे मरीजों के शरीर में परिवर्तन भी विभिन्न तरह से हो रहे हैं। इस बार गंभीर रोगियों के शरीर में खून का थक्का जमने की भी अधिक समस्या आ रही है। इससे निपटने के लिए चिकित्सक खून काे पतला करनेवाली दवा दे रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, खून में थक्का जमने की स्थिति गंभीर होती है, इसलिए उसकी नियमित जांच कराने के लिए आवश्यक उपचार पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के क्रिटिकल केयर यूनिट के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, कोरोना के मरीजों के खून में थक्का जमने की समस्या आ रही है। उनके अनुसार, कोरोना वायरस शरीर में बहुत सारा बदलाव लाता है। शरीर में बहुत सारे द्रव्य (साइटोकाइन) निकलते हैं जो धमनी के अंदरूनी भाग को नुकसान पहुंचाता है। इससे प्लेटलेट्स एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं जिससे खून का थक्का बनने लग जाता है। यह पूरे शरीर में होता है। फेफड़े को भी इससे काफी नुकसान पहुंचता है।

ब्रेन या हर्ट में ऐसा होने से क्रमश: स्ट्रोक या हर्ट फेल्योर की समस्या होती है। हालांकि यह खतरा गंभीर रोगियों में ही रहता है। इससे बचने के लिए रोगियों की डी डायमर जांच कराई जाती है तथा जरूरत पड़ने पर आवश्यक उपचार किया जाता है। बकौल, डाॅ. भट्टाचार्य इस बार यूके स्ट्रेन व डबल म्यूटेन वायरस फेफड़े को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। इस बार बड़ी संख्या में इस कारण ही अधिक मौत हो रही है।

पिछली लहर में पांच फीसद, इस बार 20 से 30 फीसद को ऑक्सीजन

डाॅ. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, यूके स्ट्रेन व डबल म्यूटेंट वायरस से फेफड़े को होनेवाले नुकसान का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि पिछली लहर में दस-पंद्रह दिनों के बाद किसी मरीज को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती थी। इस बार मरीजों को दूसरे या तीसरे दिन ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जा रही है। इसके बाद वेंटिलेटर की भी तुरंत जरूर पड़ जाती है। उनके अनुसार, पिछली लहर में महज तीन वेंटिलेटर बेड से काम चल गया था। इस बार रिम्स में 100 वेंटिलेटर भी कम पड़ रहा है।

लक्षण के आधार पर तुरंत इलाज कराएं संक्रमित

डाॅ. प्रदीप भट्टाचार्य ने बहुत कम समय में फेफडे़ को हो रहे नुकसान को देखते हुए मरीजों को समय पर इलाज कराने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार, मरीज अपने शरीर में लक्षण और हो रहे बदलाव को समझें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। उनके अनुसार, समय पर इलाज नहीं होने से भी मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है।

क्या है डी डायमर टेस्ट

रक्त की डी डायमर जांच से किडनी, हृदय, फेफड़े आदि में खून के रिसने या थक्का बनने की जानकारी मिलती है। डी डायमर एक प्रकार का प्रोटीन है। यदि जांच निगेटिव है तो खून में थक्का नहीं जम रहा है। इससे खून में प्रोटीन के स्तर की भी जानकारी मिलती है। जानकारों के अनुसार, कोरोना मरीजों में प्रोटीन का छोटा टुकड़ा खून में घुलने लगता है, उस स्थिति में थक्का जमता है।