यास से प्रभावित क्षेत्रों में मदद को आगे आया यूएन, नेपाल और बांग्लादेश की स्थिति पर भी नजर

 

प्राकृतिक आपदा में टीकाकरण के सुस्त होने की आशंका भी बनी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र ने चक्रवात यास से प्रभावित क्षेत्रों में मदद के लिए अपनी एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है। नेपाल और बांग्लादेश की स्थिति पर भी नजर रखे हुए है। बांग्लादेश में रोहिंग्याओं के शरणार्थी कैंप को चक्रवात ने प्रभावित नहीं किया है।

न्यूयार्क, प्रेट्र। चक्रवात यास से भारत के पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में तबाही मचने के बाद संयुक्त राष्ट्र मदद के लिए आगे आया है। संयुक्त राष्ट्र(यूएन) ने कहा है कि चक्रवात के आने से पलायित हुए लोगों के आश्रय स्थलों पर कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य की देखभाल करना बड़ी चुनौती है। प्राकृतिक आपदा में टीकाकरण के सुस्त होने की आशंका भी बनी हुई है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने यास से प्रभावित क्षेत्रों के बारे में जानकारी ली है। महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने इन प्रभावित क्षेत्रों में मदद के लिए अपनी एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है। नेपाल और बांग्लादेश की स्थिति पर भी हम नजर रखे हुए हैं। बांग्लादेश में रोहिंग्याओं के बड़े शरणार्थी कैंप काक्स बाजार को चक्रवात ने प्रभावित नहीं किया है। यहां का भी हम पूरा ध्यान रखे हुए हैं। ज्ञात हो कि यास चक्रवात को देखते हुए भारत ने पहले से ही सुरक्षात्मक उपाय किए हुए हैं। चक्रवात से पहले उड़ीसा में साढ़े छह लाख और पश्चिमी बंगाल में 15 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

बता दें कि बुधवार सुबह करीब नौ बजे ओडिशा के भद्रक जिले के धामरा में चक्रवात यास तट से टकराया। इस दौरान हवा की गति 130-145 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। बालासोर और भद्रक जिले के के 128 तटीय गांवों में पानी भर गया। वहीं, बंगाल में पर्यटन स्थल दीघा और गंगासागर का विख्यात कपिल मुनि मंदिर परिसर भी जलमग्न हो गया। दीघा के निकट स्थित पर्यटन स्थलों मंदारमनी, ताजपुर और शंकरपुर में होटलों व घरों में पानी घुस गया। कुछ इलाकों में समुद्र तट पर नारियल के पेड़ों के बराबर ऊंची लहरें भी देखी गईं। पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के कई गांवों में पानी घुसने से बाढ़ जैसे हालात हो गए। खेतों में समुद्र का लवण-युक्त पानी घुसने से तैयार फसलें नष्ट हो गईं। कई नदियां भारी बारिश और समुद्री पानी के कारण उफान पर हैं।