कोरोनाकाल में एक ही एप पर उपलब्ध करवा दी दवा से लेकर खाना पहुंचाने वालों की जानकारी

एप में 12 शहरों की जानकारी है उपलब्ध


 विदिशा।
 कोरोना महामारी के बीच हर रोज सैकड़ों लोगों को अस्पताल, दवा, ऑक्सीजन सहित भोजन के लिए भी भटकना पड़ रहा है। ऐसी ही स्थिति विदिशा के युवक अंकित अग्रवाल के साथ बनी तो उन्होंने भोपाल निवासी दोस्त आनंद नंदा का सहयोग लेकर महज सात दिनों में ऐसा मोबाइल एप तैयार कर दिया, जिस पर एक दर्जन बड़े शहरों में दवा दुकानों से लेकर खाना उपलब्ध करवाने वाली संस्थाओं की जानकारी मौजूद है। रविवार को ही प्लाजमैच नाम के इस एप को गूगल ने अनुमति दी है और यह उसके प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। दो दिन में ही एक हजार से ज्यादा लोगों ने इसका उपयोग भी शुरू कर दिया है।आइटी इंजीनियर अंकित बताते हैं कि पिछले दिनों परिवार के एक सदस्य के कोरोना पीड़ित होने पर स्वजनों को अस्पताल में बेड तलाशने से लेकर ऑक्सीजन तक के लिए परेशान होना पड़ा था। यह देखकर हमें लगा कि जिन्हें जानकारी नहीं है उन्हें और ज्यादा परेशानी होती होगी।

आइटी इंजीनियर अंकित बताते हैं कि पिछले दिनों परिवार के एक सदस्य के कोरोना पीड़ित होने पर स्वजनों को अस्पताल में बेड तलाशने से लेकर ऑक्सीजन तक के लिए परेशान होना पड़ा था। यह देखकर हमें लगा कि जिन्हें जानकारी नहीं है, उन्हें और ज्यादा परेशानी होती होगी। इसी के बाद उन्होंने एक ऐसा मोबाइल एप बनाने के बारे में सोचा, जहां कोरोना महामारी के दौरान जरूरत पड़ने वाली ज्यादातर चीजों की जानकारी उपलब्ध हो। यह आइडिया उन्होंने अपने दोस्त आनंद से साझा किया। एक सााह के भीतर इसे तैयार किया गया। मोबाइल एप में अभी प्लाज्मा डोनर, अस्पताल, कोविड अस्पतालों में बेड की स्थिति, ऑक्सीजन, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण, जांच सुविधाएं, वेंटिलेटर और भोजन के लिए घर पहुंच सेवा वाले रेस्टोरेंट की जानकारी उपलब्ध है।

अंकित बताते हैं कि एप को राज्य सरकारों के अधिकृत पोर्टल और एप से भी जोड़ा गया है। यहां से अस्पतालों का अधिकृत आंकड़ा लिया जाता है। इंटरनेट मीडिया पर बिखरी जानकारी एक जगह अंकित बताते हैं कि इस मोबाइल एप को क्राउड सोर्स इन्फार्मेशन से जोड़ा गया है। क्राउड सोर्स का मतलब है कि जरूरतमंद लोग और मदद के इच्छुक दोनों ही अपनी-अपनी जानकारी एप पर अपडेट कर सकते हैं। वह जानकारी तुरंत एप पर दिखने भी लगती है। इससे लोगों को वर्तमान की स्थिति का पता चल पाता है। एप की जानकारियां भी हर घंटे अपडेट होती हैं।

कोई भी दर्ज कर सकता है अपनी जानकारी

अंकित के मुताबिक एप बनाने पर 50 हजार रूपये खर्च हुए हैं। एप में अभी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, विदिशा के अलावा बेंगलुर, दिल्ली, गुरग्राम, नोएडा, रायपुर, नागपुर, हैदराबाद, मुंबई और पुणे शहर से जुड़ी सुविधाओं को शामिल किया गया है। इसमें दवाओं से लेकर भोजन उपलब्ध कराने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी जानकारी दर्ज कर सकता है। प्लाज्मा दान करने के इच्छुक लोग भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी दवा या उपकरण की अनुपलब्धता की स्थिति में उसे मुहैया कराने वाला व्यक्ति उसकी जानकारी हटा भी सकता है।

बेंगलुरू के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अर्पित जैन ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर कोरोना से जुड़ी जानकारियां हैं लेकिन बिखरी हुई हैं। उन्हें एक जगह लाकर एप में शामिल करने से लोगों को कोरोना काल में बड़ी राहत मिलेगी। इस एप को क्राउड सोर्स इन्फार्मेशन तकनीक पर बनाया गया है, जिसकी वजह से लोगों को अपडेट जानकारी मिल सकेगी।