जुनून व समर्पण की भावना रखने वाले युवाओं के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जॉब्स के बढ़ रहे मौके


आपदा प्रबंधन में र्सिटफिकेट से लेकर स्नातक और पीजी डिप्लोमा जैसे कोर्स किये जा सकते हैं।

तटीय और पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और मैदानी इलाकों में बाढ़ आदि के समय आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ बचाव व राहत कार्य में सबसे आगे होते हैं। युवाओं के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश की सेवा के साथ-साथ शानदार करियर बनाने का अवसर होता है...

नई दिल्‍ली। देश अभी कोरोना की दूसरी लहर के कहर से उबर भी नहीं पाया है कि अरब सागर से उठे चक्रवाती तूफान टाक्टे ने केरल, गोवा, कर्नाटक सहित महाराष्ट्र के कई तटवर्ती जिलों और गुजरात में तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और तीनों सेनाओं सहित आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित लोगों की टीम जुटी है। केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों के तटवर्ती इलाके अत्यंत गंभीर समुद्री चक्रवात टाक्टे से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश और तेज हवाओं के रूप में आई इस प्राकृतिक आपदा से जान-माल का नुकसान हुआ है।

हालांकि केंद्र व राज्यों की सतर्कता और एनडीआरएफ-सेना सहित आपदा प्रबंधन की सक्रियता से क्षति को कम करने में काफी मदद मिल रही है। देश-दुनिया में बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, तूफान या आगजनी जैसी घटनाओं से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर आपदा प्रबंधन (डिजास्टर मैनेजमेंट) में दक्ष लोगों की जरूरत होती है, जो जोखिम के बावजूद तत्काल राहत पहुंचाकर लोगों की हिफाजत कर सकें। यह अभी उभरता हुआ फील्ड है, जहां बहुआयामी करियर की संभावनाएं हैं। बड़ी बात यह है कि इसमें मानवता और देशसेवा का असीम सुख भी है।

बढ़ रही जॉब संभावनाएं: आपदा प्रबंधन का समुचित कोर्स कर चुके युवाओं के लिए सरकारी और गैर-सरकारी दोनों ही क्षेत्रों में जॉब्स की बेहतर संभावनाएं हैं। खासतौर से कारपोरेट कंपनियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ऐसे प्रशिक्षित लोगों की सबसे अधिक जरूरत देखी जा रही है, जो अपनी कुशलता से जान-माल बचा सकें। इसके अलावा, इस पृष्ठभूमि के लोगों की जरूरत एनजीओ में भी देखी जा रही है। यह कोर्स करने के बाद वल्र्ड बैंक, यूनाइटेड नेशंस आर्गनाइजेशन, रेडक्रॉस जैसे तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी जॉब्स के मौके होते हैं। यह कोर्स करके किसी आपदा प्रबंधन संस्थान में प्रशिक्षक/प्राध्यापक भी बना जा सकता है।

कोर्स एवं योग्यताएं: आपदा प्रबंधन में र्सिटफिकेट से लेकर स्नातक और पीजी डिप्लोमा जैसे कोर्स किये जा सकते हैं। अंडरग्रेजुएट या र्सिटफिकेट कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं होती है, जबकि पीजी कोर्स के लिए ग्रेजुएशन चाहिए।

प्रमुख संस्थान

नेशनल इंस्टी. ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, दिल्ली www.nidm.gov.in

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली www.ignou.ac.in

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी www.ssvv.ac.in

डेलही कॉलेज ऑफ फायर सेफ्टी इंजी. दिल्ली www.dcfse.com

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर डिसास्टर ऐंड एनवॉयर्नमेंट मैनेजमेंट, नागपुर www.nifedm.com

डेलही इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, दिल्ली www.dife.in

ऐसे पाएं एनडीआरएफ-एसडीआरएफ में एंट्री: चक्रवाती तूफान टाक्टे से प्रभावित राज्यों के तटवर्ती इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें आगे बढ़कर राहत पहुंचा रही हैं। जब भी देश में कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो ये जवान, स्थानीय पुलिस और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) के जवानों के साथ मिलकर लोगों की जानमाल को बचाने में सबसे आगे होते हैं। अद्र्ध सैनिक बलों से आये ये जवान किसी भी तरह की आपदा से निपटने में पूरी तरह प्रशिक्षित होते हैं। देश में अभी एनडीआरएफ की करीब 12 बटालियन हैं, जो इस तरह की किसी भी आपदा से निपटने के लिए देश के विभिन्न स्थानों पर हर समय तैनात रहती हैं। एनडीआरएफ में आम नागरिकों की सीधी भर्ती नहीं होती है। इस फोर्स में जवान देश के अद्र्धसैनिक बलों से प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) के आधार पर सात साल के लिए आते हैं। आप भी अद्र्धसैनिक बलों को ज्वाइन करके एनडीआरएफ-एसडीआरएफ का हिस्सा बनकर यहां देश और समाज की सेवा का मौका पा सकते हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व सदस्य प्रो. विनोद चंद्र मेनन ने बताया कि डिजास्टर मैनेजमेंट में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स स्वयंसेवी संस्थाओं और राज्यों के स्थानीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ मिलकर आपदाओं से निपटने में अपना सहयोग देते हैं। तूफान, बाढ़ आदि में राहत पहुंचाने के अलावा कोविड जैसे हालात में लोगों को सही जानकारी देने, उन्हें जागरूक करने या बीमारियों के बारे में उन्हें समझाने के लिए देश में ऐसे प्रशिक्षित लोगों की काफी जरूरत है। डिजास्टर मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ-साथ जो लोग समाजसेवा से जुड़े हैं या फिर साइकोलॉजी पृष्ठभूमि से हैं, उनके लिए निकट भविष्य में यह एक अच्छा फील्ड हो सकता है।