वैरिएंट पिछले स्ट्रेन से ज्यादा नहीं है खतरनाक! आंध्र प्रदेश में मीडिया को जिम्मेदारी के साथ खबर प्रकाशित करने की अपील

 

आंध्र प्रदेश में कोरोना के 'नए स्ट्रेन' को लेकर मीडिया को जिम्मेदारी के साथ खबर प्रकाशित करने की अपील

आंध्र प्रदेश कोविड कमांड सेंटर के चीफ डा.के.एस जवाहर रेड्डी ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी प्रकार की रिसर्च में यह नहीं पता चला है कि एन4440के (N440K) वैरिएंट पिछले स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक है। जिम्मेदारी के साथ मीडिया छापे खबरें।

हैदराबाद, एएनआइ। हाल ही में कई खबरों में दावा किया था कि आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिला है, जो राज्य में मौजूद पहले वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक है। अब आंध्र प्रदेश कोविड कमांड सेंटर के चीफ डा.के.एस जवाहर रेड्डी ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी प्रकार की रिसर्च में यह नहीं पता चला है कि एन4440के (N440K) वैरिएंट पिछले स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने सभी मीडिया से अपील करते हुए कहा कि इस वह इस प्रकार की खबरें बेहद ही जिम्मेदारी के साथ प्रकाशित करें। जानकारी के लिए बता दें कि वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि N440K वैरिएंट भारत में मौजूद स्ट्रेन से 15 गुना ज्यादा खतरनाक है।

जवाहर रेड्डी ने बताया कि दिसंबर 2020 और जनवरी-फरवरी 2021 में यह वैरिएंट तेजी से फैला था। इसके बाद मार्च तक इसका प्रसार कम हो गया। वर्तमान में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे राज्य से B.1.617 और B.1 स्ट्रेन की पहचान की गई है। 

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दक्षिण भारत में अब तक कोरोना के 5 वैरिएंट मिल चुके हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यह स्ट्रेन आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में तेजी से फैल रहे हैं। माना जा रहा है कि सबसे पहले इस स्ट्रेन की पहचान आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुई थी। इस स्ट्रेन को N440K नाम दिया गया है। यह B1.617 और B1.618 के बाद का आया नया वेरिएंट बताया गया है। 

रिपोर्ट में बताया गया था कि सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों ने अपनी शोध के दौरान पाया कि कोरोना के N440K वेरिएंट में A2a स्ट्रेन के मुकाबले 15 गुणा अधिक वायरस फैलाने की क्षमता है। इसकी वजह ये है कि यह कम समय में कई गुणा अधिक वायरस पैदा करने की क्षमता रखता है। आपको बता दें कि फिलहाल कोरोना के A2a प्रोटोटाइप स्ट्रेन ही दुनिया भर में फैला हुआ है।