वसुंधरा जन रसोई से राजस्थान का भाजपा संगठन नाराज, राजे और विरोधियों के बीच बढ़ी तकरार

वसुंधरा जन रसोई से राजस्थान का भाजपा संगठन नाराज, राजे और विरोधियों के बीच बढ़ी तकरार। फाइल फोटो

युनूस खान का कहना है कि वसुंधरा राजे को चाहने वाले हर जिले कस्बे और गांव में यह रसोई चला रहे हैं। प्रदेश भाजपा के कई नेताओं ने वसुंधरा जन रसोई पर आपत्ति जताई है। इन नेताओं का कहना है कि संगठन के स्तर पर सामाजिक सेवा होनी चाहिए।

जयपुर। राजस्थान भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके विरोधियों के बीच बढ़ता विवाद सार्वजनिक होने लगा है। वसुंधरा विरोधी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत एकजुट हैं। ये नेता वसुंधरा राजे को संगठन की गतिविधियों से दूर रखने में जुटे हैं। इन नेताओं को जवाब देने के लिए पूर्व सीएम समर्थक नेताओं ने अब वसुंधरा जन रसोई शुरू की है। कोरोना काल में जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए पूरे प्रदेश में वसुंधरा जन रसोई शुरू की गई है। वसुंधरा के विश्वस्त पूर्व मंत्री युनूस खान, कालीचरण सराफ, प्रताप सिंह सिंघवी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी जिला स्तर के नेताओं के साथ मिलकर इस रसोई का संचालन कर रहे हैं। जन रसोई के माध्यम से वसुंधरा समर्थक अपनी ताकत का अहसास करवा रहे हैं।

युनूस खान का कहना है कि वसुंधरा राजे को चाहने वाले हर जिले, कस्बे और गांव में यह रसोई चला रहे हैं। प्रदेश भाजपा के कई नेताओं ने वसुंधरा जन रसोई पर आपत्ति जताई है। इन नेताओं का कहना है कि संगठन के स्तर पर सामाजिक सेवा होनी चाहिए, नेता विशेष के नाम से नहीं है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री और वसुंधरा विरोधी खेमे के नेता मदन दिलावर का कहना है कि कार्यक्रम तो पार्टी के बैनर तले ही होना चाहिए। एक तरफ वसुंधरा समर्थक जन रसोई चला रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश में पार्टी की ओर से सेवा ही संगठन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत काढ़ा, सैनिटाइजर, मास्क वितरण के साथ ही रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। पार्टी ने जिला स्तर पर यह कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि करीब ढ़ाई साल पहले चुनाव हारने के बाद से भाजपा में गुटबाजी बढ़ी है। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सतीश पूनिया को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से वसुंधरा और उनके समर्थकों को किनारे किया जाने लगा है। संगठन में वसुंधरा विरोधियों की वर्चस्व बढ़ा है। इससे वसुंधरा और उनके समर्थक नाराज हैं। इसी नाराजगी के चलते हाल ही में संपन्न हुए तीन विधानसभा सीटों के चुनाव प्रचार से वसुंधरा राजे दूर रही थीं। तीन में से भाजपा एक सीट जीत सकी और दो पर कांग्रेस का कब्जा हुआ था।