आम आदमी पार्टी सरकार की नाकामी की वजह से दिल्ली में मौत के आंकड़ें बढ़े: रामवीर सिंह बिधूड़ी

 

दिल्ली में अस्पताल बढ़ने के बजाय कम हो गएः रमेश बिधूड़ी।

आदेश गुप्ता आरोप है कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की नाकामी की वजह से दिल्ली में मौत के आंकड़ें बढ़े हैं। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से लोगों की मौत हुई। प्रति दस लाख की आबादी पर कोरोना से मरने वालों की सूची में दिल्ली सबसे आगे है।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता आरोप है कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की नाकामी की वजह से दिल्ली में मौत के आंकड़ें बढ़े हैं। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से लोगों की मौत हुई। प्रति दस लाख की आबादी पर कोरोना से मरने वालों की सूची में दिल्ली सबसे आगे है। कोरोना मरीजों की जान बचाने की जगह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनके साथी दूसरों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश में लगे रहे। मौत के आंकड़ों को छिपाया जा रहा है।

प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वर्ल्डोमीटर की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में प्रति 10 लाख पर मृतकों की संख्या 455 और भारत में 234 है। दिल्ली में यह संख्या 1207 है। दिल्ली में कोरोना से मृत्यु दर 1.69 फीसद है जबकि ओडिशा में 0.35 फीसद, केरल में 0.33फीसद और बिहार में 0.13 फीसद है।

उन्होंने कहा कि 30 मई तक दिल्ली में अबतक 24,151 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। एक अप्रैल से 17 मई के बीच दिल्ली के तीनों नगर निगमों में 16,593 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना विधि से हुआ है, जबकि इस दौरान केजरीवाल सरकार ने मात्र 11,061 मौत के आंकड़े जारी किए। 5532 मृत लोगों के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही है। यह संवेदनहीनता है और इसके लिए मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए जान गंवाने वाले योद्धाओं के साथ भी भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए कोरोना के कारण माता-पिता या अभिभावक को खोने वाले सभी बच्चों को “पीएम-केयर्स फार चिल्ड्रन“ योजना के तहत आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री केजरीवाल अपनी जिम्मेदारियों से बचने का अवसर ढूंढ़ रहे हैं।

दक्षिणी दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दूसरी लहर को लेकर आगाह करने के बावजूद भी केजरीवाल सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया और स्थिति बिगड़ती चली गई। वर्ष 2015 के चुनाव घोषणा पत्र में आप ने प्रत्येक एक हजार की आबादी पर पांच बेड उपलब्ध कराने का वादा किया था। वहीं, 2019 में दिल्ली सरकार के इकोनामिक सर्वे के अनुसार साल 2014 में दिल्ली में कुल 95 अस्पताल थे लेकिन साल 2019 आते-आते इनकी संख्या कम होकर 88 रह गई है। केजरीवाल सरकार की लापरवाही का सबसे बड़ा सुबूत साल 2013-14 में शुरू किए गए अस्पतालों का अबतक तैयार नहीं होना है।।