मजबूत इम्युनिटी से बेअसर होगा ब्लैक फंगस, ये बरतें सावधानी

नाक में सूखापन, काली पपड़ी जमना या फिर खून आना।

इंदौर के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. ओ. पी. अग्रवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमायकोसिस नई बीमारी नहीं है। यह वायरस कई सालों से वातावरण में मौजूद है। आम दिनों में यह संक्रमित नहीं करता लेकिन जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है वे इससे प्रभावित हो रहे हैं...

इंदौर। कोरोना संक्रमण से ठीक हो रहे कई मरीजों में अब ब्लैक फंगस संक्रमण दिखाई दे रहा है। पिछले एक-डेढ़ माह में कोविड-19 संक्रमितों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। इस संक्रमण के कारण न सिर्फ लोगों की आंखों की रोशनी जा रही है, बल्कि इससे संक्रमितों की मौत भी हो रही है। ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमायकोसिस नई बीमारी नहीं है। यह वायरस कई सालों से वातावरण में मौजूद है। घरों में रोटी, ब्रेड या प्याज पर दिखने वाली फफूंद भी ब्लैक फंगस का ही एक प्रकार है। आम दिनों में यह संक्रमित नहीं करता, लेकिन इन दिनों जिन लोगों की शुगर बढ़ी हुई है और इम्युनिटी कमजोर है, वे इससे प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि ब्लैक फंगस कोरोना की तरह संक्रमण से फैलने वाली बीमारी नहीं है।

10 से 25 दिन तक है खतरा: लोगों को कोरोना संक्रमण होने के 10 से 25 दिन बाद भी ब्लैक फंगस संक्रमण हो रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक यह स्पष्ट है कि कोविड-19 संक्रमित मरीजों को यह संक्रमण हो रहा है। इसके अतिरिक्त जिन लोगों को डायबिटीज की ज्यादा समस्या होती है, उन्हें भी यह संक्रमण हो रहा है।

मुस्तैद है टीम: ब्लैक फंगस संक्रमण की शुरुआत नाक से होती है। कई मरीजों में यह साइनस के लक्षण के रूप में भी रहता है। इसके बाद यह संक्रमण आंख व मस्तिष्क तक भी पहुंच जाता है। कई बार मरीज की जान बचाने के लिए आंखों में फैल रहे संक्रमण को रोकने के लिए मरीज की आंखें निकालने की नौबत भी आ जाती है। यही वजह है कि जिस भी अस्पताल में ब्लैक फंगस संक्रमित मरीज का इलाज किया जाता है, वहां पर मेडिसिन, नेत्र रोग, नाक-कान व गला रोग व न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों की टीम मौजूद रहती है। यह टीम ब्लैक फंगस संक्रमण वाले मरीजों का संयुक्त रूप से इलाज करती है।

तुरंत करें डॉक्टर से संपर्क

  • आंखों में सूजन हो या दृष्टि में कोई समस्या आ रही हो।
  • नाक में सूखापन, काली पपड़ी जमना या फिर खून आना।
  • नाक के आसपास या आंखों के नीचे या चेहरे पर सूजन आ रही हो।
  • यदि मुंह में छाले हो रहे हों और उन पर काली पपड़ी जम रही हो तो भी सावधान होने की आवश्यकता है।

स्टेरॉयड्स व हायर एंटीबायोटिक इंजेक्शन के कारण बढ़ती है परेशानी: कोविड-19 संक्रमित मरीजों को चिकित्सक इलाज के दौरान स्टेरॉयड देते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, जिन मरीजों को ज्यादा स्टेरॉयड्स या हायर एंटीबायोटिक इंजेक्शन दिए गए हैं उन्हें ही इस तरह का संक्रमण अधिक हो रहा है। बहुत से शहरों में जिला प्रशासन व चिकित्सकों द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए प्रोटोकॉल निर्धारित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों को मरीजों को स्टेरॉयड्स न देने व बहुत जरूरी होने पर ही टोसिलीजुमाब इंजेक्शन देने के निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे मरीज जो अभी तक होम आइसोलेशन में थे और जिन्होंने स्टेरॉयड्स या अन्य इंजेक्शन नहीं लिए उनमें भी ब्लैक फंगस की समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे में बीमारी सामने आने की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचकर इलाज करवाना आवश्यक है।

ये रखें सावधानी: इंदौर जनरल के फिजीशियन डॉ. आर. पी. माहेश्वरी ने बताया कि जिस संक्रमित मरीज को नियमित ऑक्सीजन लगाई गई हो उनमें से कई को म्यूकरमाइकोसिस की समस्या ज्यादा हो रही है। ऑक्सीजन र्सिंलडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में इस्तेमाल किया जाने वाला पानी मेडिकेटेड डिस्टिल्ड वाटर होना चाहिए। पानी को नियमित बदला जाना चाहिए। इसके स्थान पर सामान्य पानी का उपयोग भी हानिकारक हो सकता है। ऑक्सीजन मशीन और र्सिंलडर के साथ जुड़े उपकरणों को भी नियमित साफ करना चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज के रोगियों के साथ ही जिन्हेंं संक्रमण मुक्त होने के लिए अधिक स्टेरॉयड दिए गए हों, ठीक होने के बाद भी उनके स्वास्थ की नियमित जांच करनी चाहिए।