आखिर क्यों राजनीति के अखाड़े में फिसड्डी साबित हो रहे हैं कमल हासन !
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कमल हासन दक्षिण भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड दोनों की ही जानी मानी हस्ती है पर राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म भूषण जैसे अवॉर्ड से सम्मानित ये दिग्गज कलाकार राजनीति में जाने क्यों हमेशा भटका भटका सा नजर आता है।

नई दिल्ली। कमल हासन दक्षिण भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड दोनों की ही जानी मानी हस्ती है, पर राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म भूषण जैसे अवॉर्ड से सम्मानित ये दिग्गज कलाकार राजनीति में भटका भटका सा नजर आता है। तीन साल पहले जब कमल हासन ने अपनी पार्टी 'मक्कल नीति मैयम' की शुरुआत की तो लोगों को लगा कि वे तमिलनाडु की राजनीति को एक नई दिशा दे पाएंगे। कमल ने खुद भी अपने आपको वैकल्पिक राजनीति के चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया साथ ही अरविन्द केजरीवाल को अपना आदर्श भी बताया। पर वे अपने विजन और विचाराधारा को लोगों को समझाने में अब तक सफल नहीं हो पाए हैं।

लोकसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों की जमानत हुई थी जब्त

उनकी पार्टी ने 2019 लोक सभा चुनावों में 39 में से 37 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी पर उनके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई। ऐसी ही हार का सामना उन्हें 2021 के विधान सभा चुनावों में भी करना पड़ा है जहां उनके 142 प्रत्याशियों में से केवल एक यानि खुद कमल हासन ही कोयम्बटूर साउथ सीट से सफल होते दिख रहे हैं।

एमजीआर, जयललिता से होती है तुलना

कुछ वर्ष पहले तक कमल की तुलना एमजीआर, जयललिता और करुणानिधि जैसे फिल्मी दुनियां से आए मुख्यमंत्रियों से की जा रही थी, और उम्मीद जताई जा रही थी कि वे भी राजनीति में कामयाबी की नई दास्तान लिखेंगे। पर जब 2018 में कमल हासन ने मक्कल नीति मैयम की शुरुआत की तब उनका करियर ढलान पर था जबकि एमजीआर और करुणानिधि अपने फिल्मी करियर के चरम रहते हुए द्रविड़ राजनीति के चर्चित चेहरे थे और अपनी फिल्मों से अपनी विचारधारा का प्रचार प्रसार करते थे।

तमिलनाडु की जनता को नहीं है कमल हासन में दिलचस्पी

तमिलनाडु की जनता की बात करें तो उसमें राजनीतिक प्रयोग में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखती है। पिछले 50 साल से तमिलनाडु की सत्ता का सिंहासन बारी-बारी से द्रमुक और अन्नाद्रमुक के पाले में ही आता रहा है। इसीलिए अब हासन के राजनीति में उतरने के साथ ही सियासी समीकरण के बदलते हुए मायनों पर कयास लम्बे समय से लगाए जा रहे थे।

परिपक्व होने में लगेगा समय

कमल हासन की बैक टु बैक चुनावी असफलताओं ने तो यही दिखाया है कि अभी इस मंझे हुए फिल्मी कलाकार को राजनीति में और परिपक्व होने की जरूरत है।