कोरोना संकटकाल में देशभर से आगे आए दानवीर, जिंदगियां बचाने में इनकी रही अहम भूमिका

 


कोरोना संकट में देशभर से सामने आए दानवीर। (फोटो: दैनिक जागरण)

कोरोना संकटकाल में देशभर के विभिन्न इलाकों से कई दानवीर सामने आए हैं। देशभर में उद्यमी और कारोबारी अपने-अपने स्तर से जिंदगियां बचाने में जुटे रहे। इसकी मदद से कई जिंदगियां और घरों को बचाने में मदद मिली। आइए जानें उनकी कहानी..

नई दिल्ली,  कोरोना काल में जीवनरक्षक उपकरणों और संसाधनों की कमी पड़ी तो देशभर में उद्यमी और कारोबारी अपने-अपने स्तर से जुट गए जिंदगियां बचाने के सबसे बड़े मिशन में। संख्या बहुत बड़ी है, शहर-शहर मदद को हाथ बढ़े हैं। इन्हीं में से कुछ का जिक्र करती यह रिपोर्ट  वास्तव में उन सभी को सलाम है, जिन्होंने इस विकट काल में एक भी जान बचाई, मानवता की अलख जगाई....

दुआ बंधु ने कायम की सेवा की मिसाल (देहरादून)

औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई (देहरादून) के उद्यम जेएमडी (जय माता दी) फुटवियर कंपनी के एमडी मुंबई निवासी गौरव दुआ व आशीष दुआ कोरोना की दूसरी लहर में गरीब व जरूरतमंदों का सहारा बने हुए हैं। वे कोरोना के गंभीर रोगियों को ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर व ऑक्सीजन फ्लोमीटर मुफ्त दे रहे हैं। गंभीर रोगियों को दून अस्पताल पहुंचाने के लिए वो अपने खर्चे पर एंबुलेंस भेजते हैं। संक्रमण के मामले बढ़ते देख उन्होंने जरूरतमंदों की मदद के लिए सबसे पहले दून के सभी थाना-चौकियों में संपर्क साधा। फिर डिमांड पर उन्हें खाद्य सामग्री के पैकेट पहुंचा रहे हैं। 

हरसंभव मदद को तैयार (गोरखपुर)

चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के महासचिव प्रवीण मोदी के पास गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में तीन ऑक्सीजन प्लांट हैं। ऑक्सीजन की मांग बढ़ी तो उन्होंने 1.5 क्यूबिक मीटर वाले सिलिंडर में निश्शुल्क ऑक्सीजन भरने की घोषणा कर दी। उनके तीनों प्लांट से प्रतिदिन 150-200 छोटे सिलिंडर में ऑक्सीजन भरी जा रही है। कोरोना की पहली लहर में भी उन्होंने अपने दो प्लांटों के जरिए मोर्चा संभाला था। 

बनारस को मिली प्राणवायु (बनारस)

बनारस के प्रमुख उद्यमी व इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.के. चौधरी  ने न सिर्फ औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ समन्वय कर 200 सिलिंडर का इंतजाम किया, बल्कि स्थिति की गंभीरता देखते हुए औरंगाबाद की कंपनी से डील में एक करोड़ रुपए का भुगतान कर दो दिन में ऑक्सीजन प्लांट का इंतजाम किया। पेपर, पैकेजिंग व स्टील इंडस्ट्री से जुड़़े आर.के. चौधरी के बेटे ने प्लांट की खरीद में देरी देखते हुए बनारस ब्रांड प्लांट का खाका खींचा और प्रशासन की मदद से उसे भी मुकाम पर पहुंचाया।

टीका महोत्सव में योगदान (पटना)

पिछले साल कोरोना काल में 35 हजार लोगों को खाना बंटवाने के बाद स्टील सेक्टर के व्यवसायी संजय गोयनका इस साल भी कोरोना पीड़ितों की मदद में जुटे हुए हैं। इस साल लायंस क्लब ऑफ पटना सेंट्रल के सहयोग से उन्होंने चार ई-रिक्शा किराए पर लेकर 45 साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों को वैक्सीनेशन कराने का काम शुरू किया। इसके तहत लोगों को घर से अस्पताल ले जाकर वैक्सीन लगवाकर फिर उन्हें घर पहुंचा दिया जाता है। इसके साथ ही अब तक वे 35 मरीजों को मुफ्त ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराकर उनकी जान बचा चुके हैं।

दो दिन में खड़ा किया अस्पताल (फरीदाबाद)

कोरोना की दूसरी लहर से औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के संक्रमित गाड़ियों में दम तोड़ रहे थे। ऐसी भयावह स्थिति में उद्योगपति राजीव चावला, विवेक दत्ता और रोहित जैन की तिकड़ी ने 100 बेड का कोविड अस्पताल अगले दो दिन में डीपीएस ग्रेटर फरीदाबाद में स्थापित किया। उनके साथ शहर के प्रसिद्ध चिकित्सकों की टीम जुड़ी। दो दिन की प्लानिंग के बाद युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू हुई। अस्पताल स्थापित होने पर फरीदाबाद सहित दिल्ली के 200 मरीज यहां आकर भर्ती हुए और स्वस्थ होकर वापस लौटे। कळ्छ अब भी उपचाराधीन हैं। 

एक कॉल में मदद हाजिर (नोएडा)

कोरोना महामारी से निपटने में सरकार का साथ देने की कमान संभाली उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक संगठन इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने। आइएएस राजीव बंसल ने सभी सदस्यों के साथ मिलकर नोएडा समेत प्रदेश के 55 क्लस्टर में 4,500 सदस्यों व उनके परिवार के कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए प्रयास शुरू हुए। इसके लिए लखनऊ में कॉल सेंटर बनाया गया, जहां एक कॉल पर संक्रमित की सहायता के लिए संबंधित क्लस्टर के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। इसके साथ ही फैक्ट्रियों से डी टाइप 60 लीटर क्षमता के 250 ऑक्सीजन सिलिंडर दिए।

वाट्सएप ग्रुप पर बना कारवां (मुंबई)

पेशे से होटेलियर मार्जी पारख ‘लिव टु गिव’ नामक 10 से अधिक वाट्सएप ग्रुप के जरिए 1,000 से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ चुके हैं। इस ग्रुप में युवा, व्यापारी, उद्यमी, सरकारी अधिकारी और गृहणियां जुड़े हैं। बीते साल लॉकडाउन शुरू होने के बाद से इस समूह ने नौ राज्यों में भोजन व राशन के लाखों पैकेट्स के साथ मुंबई पुलिस को सात करोड़ रुपए के मास्क बांटे। कोरोना मरीजों को बिस्तर व प्लाज्मा दिलवाने में भी यह समूह सहायक रहा है। समाज के प्रति मार्जी के इस योगदान को चिन्हित करते हुए उन्हें 2020 का मदर टेरेसा सम्मान प्रदान किया गया है।   

एक रुपए में ऑक्सीजन सिलिंडर (कानपुर)

रिमझिम इस्पात के प्रबंध निदेशक योगेश अग्रवाल ने ऑक्सीजन की किल्लत से लोगों को तड़पते देखा तो अपने कानपुर स्थित प्लांट में इस्पात के उत्पादन को घटाकर इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन का प्रयोग मेडिकल ऑक्सीजन के रूप में करना शुरू किया और कानपुर सहित छह जिलों को रोज 1,000 सिलिंडर की सप्लाई शुरू की। ऐसे समय में जब ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने में छह-सात सौ रुपए खर्च हो रहे थे, उन्होंने मात्र एक रुपए में भरे हुए सिलिंडर दिए। एक रुपया भी इसलिए ताकि बिल बने और सिलिंडर की कालाबाजारी न हो। 

संजीवनी दे रही वर्धमान (लुधियाना)

कोविड-19 के दौरान वर्धमान स्पेशल स्टील लिमिटेड के एमडी सचित जैन एवं चीफ ऑपरेटिंग अफसर-सीओओ एम. के. श्रीवास्तव की टीम कोरोना योद्धा बनकर दिन-रात जुटी है। रोजाना 2,000 से अधिक ऑक्सीजन सिलिंडर भरकर सरकारी एवं निजी अस्पतालों को भेजे जा रहे हैं। आर्मी व स्वयंसेवी संगठनों को ऑक्सीजन मुफ्त दी जा रही है। बीते साल कंपनी ने सरकारी अस्पतालों को ऑक्सीजन मुफ्त उपलब्ध कराई थी। शेष सभी क्षेत्रों को ऑक्सीजन सप्लाई लागत मूल्य पर की जा रही है। यहां से ऑक्सीजन की सप्लाई लुधियाना, जालंधर, संगरूर, मलेरकोटला सहित आसपास के इलाकों में भी हो रही है।

सात समंदर पार से ले आए मदद (लुधियाना)

कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता देखते हुए लुधियाना के राउंड टेबल इंडिया के एरिया चेयरमैन व गिरनार ग्लोबल एजूकेशनल कंसलटेंसी के संचालक आयुष जैन ने अपने जानकार अमेरिकी सहयोगियों की मदद से 4,600 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर अमेरिका से आयात किए। इसमें अमेरिकी संस्था ट्राई वेली, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व इंडियन कम्युनिटी सेंटर समेत अमेरिका के 300 से अधिक भारतीय मूल के डॉक्टर सहयोग कर रहे हैं। अब तक सात से भी अधिक शहरों में ऑक्सीजन बैंक बना चुकी उनकी टीम जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मुफ्त उपलब्ध करवा रही है।