तरुण तेजपाल को दुष्कर्म के मामले में किन वजहों से मिला लाभ, निचली कोर्ट ने फैसले को किया सार्वजनिक

दुष्कर्म के मामले में आरोपित तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल

कोर्ट ने बीती 21 मई को तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 341 342 354 ए और 354 बी के तहत लगाए सभी आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था। तेजपाल पर उनकी अधीनस्थ महिला कर्मचारी ने दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

पणजी, एजेंसियां। दुष्कर्म के मामले में आरोपित तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को पुलिस द्वारा की गई लचर जांच और कथित 'पीड़िता' के व्यवहार और हावभाव से संदेह का लाभ मिला। इसी के चलते कोर्ट को तेजपाल को इस मामले में बरी करना पड़ा। यह बात उत्तरी गोवा की अतिरिक्त जिला एवं सत्र जज क्षमा जोशी ने अपने 500 से अधिक पेज के फैसले में कही है। 

लचर जांच और 'पीड़िता' के व्यवहार से तेजपाल को मिला संदेह का लाभ

कोर्ट ने बीती 21 मई को तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 341, 342, 354 ए और 354 बी के तहत लगाए सभी आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था। उल्लेखनीय है तेजपाल पर उनकी अधीनस्थ महिला कर्मचारी ने ग्रांड हयात होटल की लिफ्ट में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। ये दोनों अपने आफिस की ओर से आयोजित एक इवेंट में भाग लेने के लिए गोवा आए थे। करीब साढ़े सात साल पुराने इस मामले में क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था। फैसले में लचर जांच का ठीकरा क्राइम ब्रांच पर फोड़ा गया है। जज क्षमा जोशी ने तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के आदेश देते हुए कहा कि उन्हें संदेह का लाभ दिया जाता है। 

कोर्ट ने पीड़िता के दहशत में आने के तर्क को खारिज किया

इसकी वजह यह है कि शिकायतकर्ता अपनी शिकायत को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं दे पाई। आदेश में इस कहा गया कि इस मामले की जांच अधिकारी सुनीता सावंत ने केस के महत्वपूर्ण पहलुओं की ठीक से जांच नहीं की। जज ने कहा कि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि दुष्कर्म का पीड़िता पर बेहद बुरा असर पड़ता है। इससे उसकी मानसिक स्थिति भी खराब हो जाती है। लेकिन दूसरी तरफ यह भी ध्यान रखना होता है कि गलत आरोप में कोई शख्स न फंस जाए। इस मामले में यौन उत्पीड़न की घटना के बाद पीड़िता के दहशत में आने के तर्क को भी अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के व्यवहार और वाट्सएप संदेशों से नहीं लगता कि वह किसी बुरे अनुभव से गुजरी है। कथित घटना के बाद भी उसकी गोवा में रुकने की तैयारी थी। कोर्ट ने कहा कि पीडि़ता, पीड़िता की मां और भाई के बयान से यह साफ नहीं होता कि वह घटना के बाद दहशत में थी। यही नहीं जज ने कहा कि शिकायत में कई तरह के विरोधाभासी बयान भी दर्ज कराए गए हैं। 

गोवा सरकार ने बांबे हाई कोर्ट में की अपील

दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को निचली अदालत द्वारा संदेह का लाभ देते हुए बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने मंगलवार को बांबे हाई कोर्ट में अपील की है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने यह जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार पीडि़ता को न्याय मिलने तक यह मुकदमा लड़ेगी। उल्लेखनीय है कथित दुष्कर्म के इस मामले में तेजपाल को 30 नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। उनके खिलाफ 29 सितंबर 2017 को आरोपपत्र दाखिल हुआ था।