बिहार, मध्य प्रदेश सहित 10 राज्यों में वन्यजीवों के लिए बनेगा चारागाह, चारे-पानी की नहीं होगी कमी


बिहार, मप्र सहित दस राज्यों में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त चारे-पानी का होगा प्रबंध

वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बिहार मध्य प्रदेश सहित दस राज्यों में वनक्षेत्र में नए जल क्षेत्र और चारागाह तैयार करने से जुड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके तहत इन सभी राज्यों के जंगल में नए जल क्षेत्रों का निर्माण होगा।

नई दिल्ली,  ब्यूरो। जंगल में वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के साथ ही वन एवं पर्यावरण मंत्रालय अब उनके चारे और पानी के पर्याप्त इंतजाम में जुट गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शुक्रवार को बिहार, मध्य प्रदेश सहित दस राज्यों में इससे जुड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसके तहत इन सभी राज्यों के जंगल में नए जल क्षेत्रों का निर्माण होगा। जिससे वन्यजीवों के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता होगी। साथ ही समूचे वनक्षेत्र के जलस्तर में भी सुधार होगा। पानी की उपलब्धता से जंगल में घास सहित दूसरी वनस्पतियों का भी तेजी से विकास होगा।

जावडेकर ने बताया कि बाकी के 16 राज्यों के लिए भी जल्द ही इस प्रोजेक्ट की मंजूरी दी जाएगी। फिलहाल देश के जिन दस राज्यों के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है, उनमें बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम, गोवा, महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। मंत्रालय का मानना है कि इस पूरी पहल से वन्यजीवों को पानी और चारे के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही इससे वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच होने वाले संघर्ष में भी कमी आएगी। मौजूदा समय में वन्यजीव चारे और पानी की तलाश में जंगल में बाहर निकलते हैं और खेतों का नुकसान करते हैं। जिसके बाद मनुष्यों के साथ उनका संघर्ष शुरू होता है। लेकिन जब वन्यजीवों को जंगल के अंदर ही पर्याप्त पानी और चारा मिल जाएगा तो वह बाहर नहीं निकलेंगे।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने जंगल से जुड़े इन प्रोजेक्ट को मंजूरी के साथ ही बताया कि इन कामों को कैंपा (कंपेंसेटरी अफारेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एवं प्ला¨नग अथारिटी) फंड के तहत राज्यों को मुहैया कराई गई राशि से किया जाएगा। साथ ही वित्तीय आयोग की सिफारिश के बाद सभी राज्यों को इस बार पंद्रह फीसद ज्यादा बजट भी दिया गया है। जंगल के विकास के लिए कैंपा के तहत भी सभी राज्यों को पिछले साल करीब 40 हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं। गौरतलब है कि मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में जल शक्ति मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी वाप्कोस की मदद ली थी। जिसने लिडार (लाइट डिडेक्टर एवं रैं¨गग) तकनीक की मदद से सभी जंगलों को यह सर्वे तैयार किया है।