किसानों के लिए अच्छी खबर, मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में अब 15 जुलाई तक कराएं पंजीकरण, जानें क्या होगा फायदा

 


मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में 15 जुलाई तक पंजीकरण करा सकेंगे किसान। सांकेतिक फोटो

हरियाणा सरकार ने फसली विविधिकरण को प्रोत्साहित करने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में 15 जुलाई तक पंजीकरण अवधि बढ़ा दी है। पहले अवधि 25 जून को खत्म हो गई थी। किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि भी रखी गई है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में फसल विविधीकरण योजना के तहत धान के बजाय पानी की बचत करने वाली दूसरे फसलों की बिजाई करने के लिए किसान अब मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में 15 जुलाई तक पंजीकरण करा सकते हैं। पोर्टल पर पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 25 जून को खत्म हो गई थी जिसे अब 20 दिन के लिए और बढ़ाया गया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ शनिवार को बैठक करते हुए कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि किसानों को धान के बजाय अन्य फसलों की बिजाई के लिए प्रेरित करें। पूरे राज्य में योजना लागू है, जो किसान धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों (कपास, मक्का, दलहन, मूगंफली, तिल, ग्वार, अरंड, सब्जियां व फल) की बिजाई करेंगे, उन्हें प्रति एकड़ सात हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। जो किसान धान की जगह चारा उगाते हैं या अपने खेत खाली रखते हैं तो उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा।

क्या है विविधकरण योजना

सरकार द्वारा धान की फसल को वैकल्पिक फसलों जैसे मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियां व फल द्वारा विविधिकरण करने के लिए एक योजना मेरा पानी मेरी विरासत का शुभारंभ किया गया था। इस योजना के अंतर्गत राज्य के सभी धान क्षेत्र वाले जिले शामिल किए गए हैं। किसान अपने पिछले वर्ष बोए गए धान के क्षेत्र को वैकल्पिक फसलों जैसे मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियां व फल में बदल सकता है। फसल विविधिकरण करने वाले किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

बढ़ती है जमीन की ऊर्वरा क्षमता

हरियाणा सरकार का मानना है कि फसल विविधिकरण और फसल चक्र अपनाकर काफी हद तक जमीनों की उपजाऊ शक्ति को बरकरार रखा जा सकता है, लेकिन इसके बाद भी बहुत से किसान परंपरागत फसलों की खेती से मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति लगातार कम हो रही है। लिहाजा भविष्य में यदि कोई किसान जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपने खेत को खाली रखता है तो सरकार उसे प्रोत्साहन राशि देगी। मुख्यमंत्री ने हास ही में प्रगतिशील किसानों, फसल चक्र अपनाने वाले तथा फसल विविधिकरण के जरिये अधिक पैदावार लेने वाले किसानों के साथ ही विशेषज्ञों तथा वैज्ञानिकों से भी बात करने को कहा है, ताकि उनकी एक्सपर्ट राय सामने आ सके।

किसानों को अपनी फसल के बारे में जानकारी देनी होगी 

हरियाणा सरकार ने पहले से प्रावधान कर रखा है कि किसानों को अपनी फसल के बारे में जानकारी देनी होगी। किसानों को बताना होगा कि कितनी जमीन में उन्होंने फसल बोई है और कितनी जमीन खाली रह गई है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसानों को हर एकड़ में बोई गई फसल की जानकारी देने के साथ ही यह भी बताना पड़ेगा कि कितनी जमीन ऐसी है जिस पर कोई फसल नहीं बोई गई। हरियाणा सरकार में 92 लाख एकड़ भूमि सत्यापित है, जिसमें से करीब 68 लाख भूमि पर खेती की जा रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि बाकी 24 लाख एकड़ भूमि का भी पता लगाया जाना चाहिए कि इसका इस्तेमाल किस रूप में हो रहा है।