देश को कोरोना की तीसरी लहर से बचाना है तो 5 रणनीतियों पर तुरंत काम करे सरकार, PHDCCI का सुझाव

 


देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को लेकर तैयारी।(फोटो: दैनिक जागरण)

देश में कोरोना की दूसरी लहर तो अब थमती नजर आ रही है लेकिन इसी बीच कोरोना की तीसरी लहर को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की सरकार को 5 रणनीतियों पर काम करने की सलाह।

नई दिल्ली, प्रेट्र। देश में कोरोना की दूसरी लहर की बेकाबू रफ्ता अब थम चुकी है। देश में रोजाना कोरोना के मामलों में गिरावट आ रही है। देश के अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन में छूट के साथ बाजारों को अनलॉक किया जा रहा है। इस बीच, देश में आने वाले समय में संभावित तीसरी लहर की आशंका भी जताई जा रही है। इसको लेकर सरकार पुख्ता इंतजाम कर रही है। इस बीच, उद्योग मंडल PHDCCI ने बुधवार को सरकार को देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर की संभावना को रोकने के लिए पांच स्तरीय प्लान(रणनीति) पर काम करने का सुझाव दिया हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो पांच रणनीतियां जिन पर सरकार को तुरंत काम करने की सलाह PHDCCI द्वारा दी गई है।

कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए ये हैं वो 5 रणनीतियां

पहली रणनीति

उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की पहली रणनीति ये है कि केंद्र सरकार को गाइडलाइन के तहत ऐसे जिले में लॉकडाउन लागू कर देना चाहिए, जहां सक्रिय मामलों की संख्या 500 से अधिक है। एक जिले में तत्काल लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए, जहां सक्रिय कोरोना वायरस मामलों की संख्या 500 से अधिक है।

दूसरी रणनीति

PHDCCI के सुझावों के अनुसार, सरकार को अगले 3-4 महीनों में कम से कम आधी आबादी का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

तीसरी रणनीति

इसके साथ ही मास्क पहनना, शारीरिक बनाए रखने जैसे सख्त नियमों को अपनाना सुनिश्चित करना और सूक्ष्म नियंत्रण क्षेत्रों(माइक्रो कंटेनमेंट जोन) के लिए सख्त मानदंडों और अनुपालन को अपनाना शामिल है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि यह एक परिभाषित भौगोलिक क्षेत्र के अंदर और बाहर फैले संक्रमण को रोकने में मदद करेगा।

चौथी रणनीति

उन्होंने कहा कि अगले तीन महीने देश के स्वास्थ्य ढांचे की क्षमता और गुणवत्ता को युद्ध स्तर पर बढ़ाने के लिए समर्पित होने चाहिए।

पांचवीं रणनीति

उन्होंने कहा कि सरकार को ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां बचाने के लिए ऑक्सीजन, अस्पताल के बेड- विशेष रूप से आईसीयू बेड, डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।