दुनियाभर में दिखा 'रिंग ऑफ फायर' का अद्भुत नजारा, जानिए भारत में कहां पड़ा आंशिक सूर्य ग्रहण

 


विश्व में कई जगहों पर पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखा, तो कई जगहों पर रहा आंशिक

विज्ञान के मुताबिक सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण दूसरा आंशिक सूर्य ग्रहण और फिर तीसरा वलयाकार सूर्य ग्रहण। पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चांद आकर सूर्य की रोशनी को पूरी तरह से ढक लेता है।

नई दिल्ली, एजेंसियां। साल का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून यानी गुरूवार को वृषभ राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगा। इस अदभुत खगोलीय घटना को देखने के लिए लोगों में खासी उत्सुकता देखी गई। ये वलयाकार सूर्य ग्रहण था जो उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों के साथ, यूरोप और एशिया में भी कई जगहों पर देखा गया। ग्रीनलैंड, उत्तरी कनाडा और रूस में पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को मिला। लेकिन भारत में लोगों के हाथ सिर्फ मायूसी ही आई।

भारत में ज्यादातर जगहों पर सूर्य ग्रहण नहीं दिखा। ये ग्रहण पूर्वोत्त्र राज्य अरुणाचल और लद्दाख में ही आंशिक तौर पर दिखाई दिया। सूर्य ग्रहण देखने के मामले में आज कनाडा के लोग सबसे ज्यादा भाग्यशाली रहे क्योंकि यहां सूर्य ग्रहण का सबसे बेहतरीन नजारा देखने को मिला। यहां सूर्य ग्रहण की वजह से कई जगहों पर कुछ देर के लिए अंधेरा भी छाया रहा। सेंट्रल और ईस्टर्न कनाडा के अलावा ओंटारियो के वेस्टर्न और नॉर्दर्न हिस्से के आस-पास के इलाके, नॉर्थ-वेस्ट क्यूबेक का एक छोटा सा हिस्सा, कनाडा के एक नए क्षेत्र ईस्टर्न नानावुट जैसे इलाकों में रहने वाले लोग बिल्कुल सामने से सूर्य ग्रहण के दौरान 'रिंग ऑफ फायर' का नजारा ले सके।

कई तरह के होते हैं सूर्य ग्रहण

ब्रहमांड में घटित होने वाली अद्भुत खगोलीय घटना सूर्य ग्रहण के भी कई प्रकार होते हैं। यही कारण है की सूर्य ग्रहण अलग अलग जगहों पर कई अलग तरह से देखा जाता है। जैसे की इस बार हुआ। विश्व में कई जगहों पर पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखा, तो कई जगहों पर आंशिक और कई देशों में ये वलयाकार के रूप में दिखा यानी ‘रिंग ऑफ फायर’।

विज्ञान के मुताबिक सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण, दूसरा आंशिक सूर्य ग्रहण और फिर तीसरा वलयाकार सूर्य ग्रहण। पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चांद आकर सूर्य की रोशनी को पूरी तरह से ढक लेता है। इस दौरान पृथ्वी पर अंधेरा छा जाता है। ये घटना बहुत ही कम वक्त के लिए देखने को मिलती है। तो वहीं आंशिक सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य के कुछ ही हिस्से को ढक पाता है। जिससे सूर्य की पूरी रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंचती इसे ही आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है। तो वहीं वलयाकार सूर्य ग्रहण यानी 'रिंग ऑफ फायर' के वक्त चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच इस तरह से आता है कि जिससे सूर्य का सिर्फ बीच का भाग ही चांद से ढक पाता और सूर्य के बाहरी किनारे ही दिखाई देते हैं। इस दौरान धरती से देखने पर सूर्य आग की अंगूठी की तरह दिखाई देता है। इसलिए इसे रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण भी कहते हैं।

वैज्ञानिकों की क्या है राय!

विज्ञान और वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सूर्य ग्रहण का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है। आमतौर पर देखा गया है की, ग्रहण को लेकर बहुत सी भ्रांतियां होती हैं। जैसे की गृभवती महिला पर ग्रहण का बुरा असर होता, ग्रहण के दौरान बाहर न निकले आदि। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सूर्य ग्रहण के दौरान ऐसा कुछ नहीं है, जिससे कुछ भी नुकसान हो। बस इतनू सावधानी रखनी है की, सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें। इसमें भी अगर आप ग्रहण को 3 सेकेंड तक नंगी आंखों से देखते हैं, तो कोई परेशानी नहीं होगी।