पाकिस्‍तान को आशंका, अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अफगानिस्‍तान में छिड़ सकता है गृह युद्ध!


अफगानिस्‍तान को लेकर पाकिस्‍तान के मन में शंका के बादल

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आशंका जताई है कि अमेरिकी फौज के अफगानिस्‍तान से चले जाने के बाद ये देश अपनी सुरक्षा नहीं कर सकेगा। इसके बाद सुरक्षा को लेकर एक सवालिया निशान लगा रहेगा।

इस्‍लामाबाद (एएफपी)। पाकिस्‍तान ने कहा है कि अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद वहां की सुरक्षा को लेकर वो काफी चिंतित है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अफगानिस्‍तान जिरगा के स्‍पीकर मीर रहमान रहमानी से वार्ता के दौरान ये बात कही है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि युद्धरत अफगान समूहों के बीच सुलह की पहले से ही धुंधली संभावनाएं हर गुजरते दिन के साथ और हल्‍की होती जा रही हैं। दो दिन बाद एक बार फिर से अफगानिस्‍तान को लेकर सरकार और तालिबान के बीच वार्ता होने वाली है। हालांकि कुरैशी ने साफ कर दिया है कि इससे पाकिस्‍तान को काफी कम उम्‍मीद हैं। पाकिस्‍तान को लगने लगा है कि अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अफगानिस्‍तान में गृह युद्ध छिड़ सकता है। 

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है अफगान समूहों के पास एक सुनहरा मौका है कि वो देश के भविष्‍य के लिए एक व्‍यापक मजबूत समझौता कर सकें जो वहां की शांति और समृद्धि के लिए कारगर साबित हो। इसमें कहा गया है कि अफगान समूहों को इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए और इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। कुरैशी के मुताबिक पिछले वर्ष सितंबर से शुरू हुई शांति प्रक्रिया में अब तक बहुत कुछ हाथ नहीं लगा है। ये भी मामूली मुद्दों पर लंबी चली बहस के बाद हासिल हुई है।आपको बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने सत्‍ता संभालने के बाद तालिबान और अमेरिका के बीच हुए समझौते की समीक्षा करने की बात कही थी। इसके अलावा उन्‍होंने ये भी कहा था कि वो समझौते के मुताबिक अमेरिकी फौज को मई तक अफगानिस्‍तान से वापस लाने में असमर्थ हैं, लेकिन 9/11 की बरसी से पहले वो अपनी फौज को पूरी तरह से अफगानिस्‍तान से बाहर निकाल लेगा।

पाकिस्‍तान की तरफ से ये भी कहा गया है कि उन्‍होंने और अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से बातचीत की मेज पर वापस आने की अपील की है और सभी विवादों को खत्‍म करने की वकालत की है, लेकिन इसका कोई असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। आपको बता दें कि अफगानिस्‍तान में पाकिस्‍तान एक ट्रांजिशनल गवर्नमेंट के पक्ष में है लेकिन अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति के विरोध के बाद ये आगे नहीं बढ़ सका है। वहीं तालिबान के नेता इस बात को मानने लगे हैं कि शांति प्रक्रिया से उन्‍हें कुछ नहीं मिलने वाला है वो जंग में जीत सकते हैं।

पाकिस्‍तान के अखबार द डॉन के मुताबिक हाल के कुछ समय में तालिबान ने अफगानिस्‍तान के कुछ बड़े और मजबूत इलाकों पर अपना कब्‍जा बना लिया है। काफी संख्‍या में अफगान सैनिकों ने तालिबान के समक्ष समर्पण भी किया है। पाकिस्‍तान को लगने लगा है कि अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्‍तान अपनी सुरक्षा नहीं कर सकेगा। मौजूदा समय में अफगान सेना देश के करीब 50 फीसद हिस्‍से में नियंत्रण रखती है। जबकि करीब 30 फीसद में तालिबान और बाकी 20 फीसद में झड़पें जारी रहती हैं।हालांकि अधिकारी ये भी मानते हैं कि ये सब कुछ जल्‍द ही बदल जाएगा। जमीन पर इसका अहसास होता भी दिखाई दे रहा है। आपको बता दें कि मौजूदा समय में अफगानिस्‍तान में करीब ढाई हजार अमेरिकी फौज और सात हजार नाटो सैनिक मौजूद हैं।