अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जारी रहा तो भयावह होगी भारत की गर्मी


दुनिया में मानव औसत सालाना तापमान छह डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 28 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान में रहते हैं।
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में छपे अध्ययन में कहा गया है कि आने वाले सालों में भारत में 1.2 बिलियन लोग गर्मी के इस ताप का सामना करेंगे जबकि पाकिस्तान में 100 मिलियन नाइजीरिया में 485 म

नई दिल्ली,। चीन, यूरोप और अमेरिका के वैज्ञानिकों के अध्ययन में सामने आया है कि आने वाले 50 सालों में भारत में मौसम का मिजाज और गड़बड़ाएगा। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की यही स्थिति जारी रही या वायुमंडल में मौजूद गैसों का तापमान ऐसे ही बढ़ता रहा तो भारत का तापमान सहारा रेगिस्तान जितना गर्म हो जाएगा।

कोरोना के प्रकोप जैसी हो सकती है स्थिति

रिसर्च पेपर के लेखक मार्टिन सेफर ने कहा कि कोरोना ने पूरी दुनिया को ऐसी मुश्किल में डाला है जिसकी कल्पना करनी भी मुश्किल है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति क्लाइमेट चेंज कर सकता है। कोरोना जैसी आपदा की तरह इसमें फिलहाल कोई बड़ा परिवर्तन होता नहीं दिखाई देता। आने वाले समय दुनिया के कई हिस्से रहने लायक नहीं रह जाएंगे और ये दोबारा ठंडे नहीं होंगे। इसका विनाशकारी प्रभाव होगा। समाज को इस आपदा से निपटने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस समस्या का मूल समाधान कॉर्बन उत्सर्जन में कटौती करना है। साफतौर पर हमको एक ग्लोबल एप्रोच बनानी होगी ताकि हमारे बच्चे इस सामाजिक, वैश्विक आपदा से निपट सकें।

शोधकर्ता ने कहा कि यह आंकड़े हमारे लिए भी चौंकाने वाले थे लेकिन हमने इनका दोबारा आकलन किया। सेफर ने कहा कि हम जानते हैं कि कई प्राणी अलग-अलग तापमान में खुद को समायोजित करते हैं। मसलन पेंग्विन बहुत ठंडे तापमान में रहती है तो कोरल गर्म पानी में। पर मानव के संदर्भ में यह बात नहीं कही जा सकती है। हम मौसम के अनुरूप गर्म कपड़े और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करते हैं। आने वाले 50 सालों में मौसम का बड़ा भयावह बदलाव होने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे में नीति निर्माताओं को इस बारे में जल्दी विचार करना होगा वरना बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती है।

हमें पर्यावरण बचाने के उपायों पर गौर करना होगा क्योंकि तापमान का 1 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ना लाखों लोगों की जान के लिए मुश्किल हो जाएगा।

कहां कितने लोग होंगे प्रभावित

-भारत 1.2 बिलियन

-पाकिस्तान 185 मिलियन

-इंडोनेशिया 146 मिलियन

-थाईलैंड 62 मिलियन

-फिलीपींस 99 मिलियन

-बांग्लादेश 98 मिलियन

-नाइजीरिया 485 मिलियन