अमेरिकी सेना की वापसी पर अफगानी राष्ट्रपति चिंतित, कहा- देश को चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत


अमेरिकी सेना की वापसी पर अफगानी राष्ट्रपति चिंतित। फाइल फोटो।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके पूर्व राजनीतिक दुश्मन अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मुलाकात की। गनी ने अफगान से अमेरिकी सेना की वापसी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस फैसले से दोनों पक्षों पर प्रभाव पड़ सकता है।

वाशिंगटन, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके पूर्व राजनीतिक दुश्मन अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मुलाकात की। इस दौरान कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई, गनी ने अफगान से अमेरिकी सेना की वापसी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस फैसले से दोनों पक्षों पर प्रभाव पड़ सकता है। अफगानिस्तान और अमेरिका के बीच ये मुलाकात ऐसे वक्त पर हो रही है, जब अमेरिकी सैनिक करीब दो दशकों से ज्यादा वक्त अफगान में बिताने के बाद वहां से वापस आ रहे हैं। अमेरिका ने अफगान से अभी तक अपनी आधी से ज्यादा सेना वापस बुला ली है। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अमेरिकी सेना, अफगान से पूरी तरह हट जाएगी।

बाइडन ने काबुल से दोस्ती निभाने का वादा किया

अफगानिस्तान से सेना की वापसी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने काबुल से दोस्ती निभाने का वादा किया है। अफगान राष्ट्रपति गनी को उन्होंने भरोसा दिलाया कि संकट की घड़ी में अमेरिका उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और हर संभव मदद के लिए तत्पर रहेगा। यहां दोनों नेताओं ने रक्षा मंत्री जान आस्टिन, सीआइए डायरेक्टर बिलियम बर्न और शीर्ष कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात की। बाइडन ने कहा कि अफगानिस्तान अपना भाग्य तय करने जा रहा है और यह बहुत कठिन कार्य है। उनके इस कार्य में हमारी सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक सहायता जारी रहेगी।

समर्थन जारी रखने का आश्वासन

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए गनी ने कहा कि सैनिकों को वापस लेने का अमेरिका का अपना फैसला है। अब काबुल को तय करना है कि वो आगे की स्थिती को कैसे संभालेंगे। उन्होंने बाइडन के साथ मुलाकात को बहुत ही फायदेमंद बताते हुए कहा कि, अफगान के आस-पास के देशों को सत्ता में बने रहने के लिए उनका समर्थन करना चाहिए, न की किसी और अन्य ताकत का। गनी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, अफगान की सरकार को उन चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है, जो विदेशी सेनाओं के जाने बाद देश में पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि लोगों को चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बाइडन ने उन्हें स्पष्ट तौर पर आश्वासन दिया है कि अमेरिका, अफगान को सुरक्षा और मानवीय सहायता देना जारी रखेगा। इस दौरान उन्होंने जानकारी दी कि, अफगान सुरक्षा बलों ने दक्षिणी और उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे वाले कई जिलों को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

वार्ता पर नहीं लगाना चाहिए विराम

अब्दुल्ला ने बाइडन के साथ बैठक के बाद रॉयटर्स के एक साक्षात्कार में कहा कि, दशकों पुरानी संघर्ष वार्ता को बिना राजनीतिक समझौते के तब तक नहीं समाप्त किया जाना चाहिए जब तक कि विद्रोही खुद देश से बाहर नहीं निकल जाते। उन्होंने कहा कि, मुझे लगता है कि जब तक तालिबान द्वारा इसे पूरी तरह से बंद नहीं किया जाता है, तब तक हमें बातचीत रास्ता बंद नहीं करना चाहिए। वहीं, काबुल में अमेरिका के पूर्व राजदूत रोनाल्ड न्यूमैन ने कहा, ऐसे समय में जब मनोबल अविश्वसनीय रूप से अस्थिर है और चीजें नीचे की ओर जा रही हैं। ऐसे में मनोबल बढ़ाने और सरकार की मदद करने के लिए कोई भी कुछ भी कर सकता है। गनी को अमेरिका आमंत्रित करना एक बहुत मजबूत संकेत है कि हम उनका समर्थन कर रहे हैं।