अंतरिक्षयान जूनो ने भेजी जुपिटर के सबसे बड़े मून 'गैनीमेड' की फोटो, दो दशक में पहली बार आया करीब


अंतरिक्षयान जूनो ने भेजी जुपिटर के सबसे बड़े मून की फोटो

सैन एंटोनियो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के जूनो प्रिंसिपल इनवेस्टीगेटर स्काट बोल्टन ने कहा है कि यह एक जनरेशन में गैनीमेड के पास जाने वाला पहला अंतरिक्षयान है। उन्होंने कहा कि अभी हम कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते हैं।

वाशिंगटन, आइएएनएस। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का भेजा गया अंतरिक्षयान जूनो दो दशक में पहली बार जुपिटर के सबसे बड़े मून गैनीमेड के नजदीक आया। इस यान ने गैनीमेड की बर्फीली सतह की फोटो भेजी है। जुपिटर (बृहस्पति) के गैनीमेड की भेजी गई इन दो तस्वीरों का नासा ने अध्ययन शुरू कर दिया है। ये तस्वीर गैनीमेड के विस्तार को दिखाती हैं, इसके साथ वहां बने हुए क्रेटर भी दिखाई दे रहे हैं।

सैन एंटोनियो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के जूनो प्रिंसिपल इनवेस्टीगेटर स्काट बोल्टन ने कहा है कि यह एक जनरेशन में गैनीमेड के पास जाने वाला पहला अंतरिक्षयान है। उन्होंने कहा कि अभी हम कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते हैं। फोटो देखकर लगता है कि यह खगोलीय आश्चर्य है। जूनो अंतरिक्षयान आने वाले समय में अभी गैनीमेड की और फोटो भेजेगा। गैनीमेड मरकरी (बुध) से भी बड़ा है और सौरमंडल में एक मात्र ऐसा मून है, जिसके साथ खुद का मैग्नेटोस्फीयर है। गैनीमेड के माध्यम से वैज्ञानिकों को खगोलीय और पर्यावरण संबंधी जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।

7 जून को जूनो बृहस्पति के सबसे बड़े चंद्रमा गैनीमेड की सतह के 645 मील (1,038 किलोमीटर) के भीतर आया। इस दौरान जुपिटर ऑर्बिटर के जूनोकैम इमेजर और इसके स्टेलर रेफरेंस यूनिट स्टार कैमरा से दो चित्र लिए। तस्वीरों में क्रेटर, स्पष्ट रूप से अलग डार्क और ब्राइट टेरेन और लंबी संरचनात्मक विशेषताएं देखी जा सकती हैं। सैन एंटोनियो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के जूनो प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर स्कॉट बोल्टन ने एक बयान में कहा, ‘यह इस पीढ़ी में इस विशाल चंद्रमा के लिए सबसे निकटतम अंतरिक्ष यान है।’