उत्तराखंड में शराब व्यवसायियों को अधिभार में मिल सकती है छूट, बाजार पूरी तरह से खुलने का इंतजार


उत्तराखंड में शराब व्यवसायियों को अधिभार में मिल सकती है छूट।

सरकार कोरोना संक्रमण के कारण लागू कोविड कर्फ्यू को देखते हुए शराब व्यवसायियों को अधिभार में छूट दे सकती है। माना जा रहा है कि सरकार उनका मई माह का अधिभार माफ कर सकती है। इसके लिए पहले बाजार का पूरी तरह से खुलने का इंतजार किया जा रहा है>

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड सरकार कोरोना संक्रमण के कारण लागू कोविड कर्फ्यू को देखते हुए शराब व्यवसायियों को अधिभार में छूट दे सकती है। माना जा रहा है कि सरकार उनका मई माह का अधिभार माफ कर सकती है। इसके लिए पहले बाजार का पूरी तरह से खुलने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि यह देखा जा सके कि दुकानें कुल कितने समय तक बंद रहीं। इसके साथ ही विभाग आबकारी की अवशेष दुकानों की नीलामी के लिए नीति में संशोधन कर सकता है। यह मसला कैबिनेट के समक्ष लाया जाएगा।

प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण 25 अप्रैल से कोविड कर्फ्यू लागू किया गया था। इस दौरान केवल फल, सब्जी, दूध व बेकरी की दुकानों को ही कुछ समय तक खोलने की छूट दी गई। शराब की दुकानों को पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इस कारण तकरीबन डेढ़ माह से ये दुकानें बंद चल रही हैं। इससे शराब व्यवसायियों को काफी नुकसान हो रहा है। दरअसल, आबकारी प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले विभागों में शामिल है।

इस वर्ष आबकारी का लक्ष्य 3300 करोड़ रुपये है। प्रतिमाह शराब की दुकानों का एक निश्चित अधिभार देना होता है। शराब की दुकानों के बंद होने के कारण बिक्री पूरी तरह ठप है। ऐसे में व्यवसायी लगातार विभाग व सरकार से अधिभार में छूट देने की मांग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस क्रम में सरकार जल्द ही इन्हें एक माह के अधिभार में छूट देने का निर्णय ले सकती है। हाल ही में मुख्य सचिव ओमप्रकाश की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस मसले पर चर्चा हुई।

बैठक में कहा गया कि पहले बाजार के पूरी तरह से खुलने का इंतजार किया जाए, ताकि यह देखा जा सके कि दुकानें कुल कितने दिन बंद रही। उसके बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाए। इस बैठक में अवशेष दुकानों के आवंटन पर भी चर्चा हुई। प्रदेश में इस साल आबकारी की 622 दुकानें स्वीकृत हैं। इनमें से 24 दुकानों का आवंटन होना शेष है। इसके लिए पुरानी शर्तों में छूट देने के लिए नीति में संशोधन किया जा रहा है। इसे आगामी कैबिनेट बैठक में रखे जाने की उम्मीद है।