क्रॉप और बायोमास बर्निंग का खतरनाक प्रभाव, लड़कियों की लंबाई पर पड़ रहा असर

 

रिपोर्ट में पाया गया कि जिनकी वित्तीय स्थिति अधिक बेहतर होती है उन टीनेजर लड़कियों की हाईट अधिक होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक बायोमास बर्निंग का नकारात्मक असर लड़कियों की शुरुआती अवस्था में होता है। अध्ययन में सामने आया कि जो लड़कियां बायोमास बर्निंग के अधिक संपर्क में आती है इसकी वजह से उनकी हाईट में 1.07 सेमी या 0.7 फीसद की कमी देखी गई।

नई दिल्ली। क्रॉप और बायोमास बर्निंग का असर लड़कियों की सेहत पर बेहद खतरनाक पड़ रहा है। इसकी वजह से लड़कियों की लंबाई कम हो रही है। यह स्टडी आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक सागनिक डे और इंडियन स्टेटिस्टिकल सेंटर की प्राची सिंह द्वारा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक बायोमास बर्निंग का नकारात्मक असर लड़कियों की शुरुआती अवस्था में होता है। अध्ययन में सामने आया कि जो लड़कियां बायोमास बर्निंग के अधिक संपर्क में आती है इसकी वजह से उनकी हाईट में 1.07 सेमी या 0.7 फीसद की कमी देखी गई। रिपोर्ट में यह भी देखने में आया कि गर्भावस्था के दौरान बायोमास बर्निंग के अधिक संपर्क में आने वाले शिशु की हाईट में 1.70 सेमी. (1.13 फीसद) की कमी आती है। सागनिक डे की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि जिनकी वित्तीय स्थिति अधिक बेहतर होती है उन टीनेजर लड़कियों की हाईट अधिक होती है। यही नहीं माता के शैक्षिक स्तर का संबंध भी हाईट से पाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में होने वाली बायोमास बर्निंग की वजह क्रॉप बर्निंग है तो असम में इसकी वजह जंगलों में लगने वाली आग है। पंजाब में क्रॉप बर्निंग और असम में जंगलों से लगने वाली आग का अध्ययन किया गया। पंजाब में अक्तूबर और नवंबर के समय बड़ी तादाद में क्रॉप बर्निंग होती है। गेहूं की फसल के कारण अप्रैल और मई में भी क्रॉप बर्निंग काफी होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर भारत के राज्य बायोमास बर्निंग से अधिक प्रभावित होते हैं। पंजाब, हरियाणा, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और नागालैंड इस समस्या से प्रभावित राज्य है।

बायोमास बर्निंग : बायोमास बर्निंग प्रदूषण का बड़ा स्रोत है। यह कॉर्बन डाइ ऑक्साइड, कॉर्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइ़ड औप पीएम कण उत्सर्जित करता है। इनका मानव शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इससे कार्डियक समस्या, श्वास से जुड़ी बीमारियां आदि होने का खतरा होता है। भारत में वायु प्रदूषण के बड़े कारण ट्रांसपोर्टेशन, कोल आधारित पावर प्लांट, एग्रीकल्चर बर्निंग, जंगलों की आग, इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन आदि है। एग्रीकल्चर बर्निंग उत्तर भारत के कई राज्यों में अधिक है। बायोमास बर्निंग भी देश के काफी राज्यों में बड़ी मात्रा में है।

बायोमस बर्निंग के बड़े घटनाक्रमों की वजह से दुनिया भर में हुई थी ये दिक्कतें

-इंडोनेशिया में 1997 में वाइल्ड फायर की वजह से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसकी वजह से बच्चों की मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई थी। इसके अलावा अस्थमा, श्वास संबंधी मरीज और प्री-टर्म बर्थ जैसे परेशानियां सामने आई थी।

-कैलोफोर्निया वाइल्ड फायर और आस्ट्रेलियन वाइल्डफायर की वजह से बच्चों के वजन में कमी जैसी दिक्कतें आई थी।-एग्रीकल्चर फायर की वजह से चीन में भी लोगों की मानसिक सेहत पर असर पड़ा था।

-अमेरिका में इसकी वजह से श्वास संबंधी समस्या, कार्डियोवास्कुलर हेल्थ पर दुष्प्रभाव पड़ा था।