कोवैक्सीन की तुलना में कोविशील्ड बनाती है अधिक एंटीबडी, भारत बायोटेक ने जताई आपत्ति

 


कोविशील्ड-कोवैक्सीन की तुलनात्मक अध्ययन रिपोर्ट में हैं कई गलतियां: भारत बायोटेक

कोविशील्ड को कोवैक्सीन की तुलना में बेहतर बताने वाले तुलनात्मक अध्ययन पर भारत बायोटेक ने ऐतराज जताया और कहा कि इस रिपोर्ट में अनेकों गलतियां हैं। कोवैक्सीन भारत बायोटेक ने विकसित किया है वहीं कोविशील्ड भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाया है।

नई दिल्ली, एएनआइ। हैदराबाद की वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी भारत बायोटेक ने बुधवार को हाल में किए गए कोवैक्सीन व कोविशील्ड वैक्सीन के तुलनात्मक अध्ययन को खारिज कर दिया और कहा कि इस रिपोर्ट में अनेकों गलतियां हैं। कोवैक्सीन भारत बायोटेक ने विकसित किया है वहीं कोविशील्ड भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोवैक्सीन की तुलना में कोविशील्ड अधिक एंटीबडीज बनाता है।

भारत बायोटेक ने यह भी कहा कि अध्ययन को ad hoc (अनौपचारिक) आधार पर किया गया। कोवैक्सीन निर्माता कंपनी ने यह भी कहा कि स्पाइक प्रोटीन पर इम्यून प्रतिक्रिया को लेकर किया गया अध्ययन त्रुटिपूर्ण है जिसमें बताया गया है कि कोविशील्ड के डोज मानव शरीर में अधिक एंटीबडी बनाता है जबकि कोवैक्सीन इसकी तुलना में पीछे है।

वैक्सीन निर्माता कंपनी ने स्पष्ट किया कि पैन इंडिया स्टडी के तहत उन हेल्थकेयर वर्करों से राय ली गई जिन्होंने वैक्सीन की पूरी खुराक ली थी और यह दोनों का एक जैसा समीक्षा नहीं था। भारत बायोटेक ने यह भी है कि यह अध्ययन न तो CTRI वेबसाइट पर अपलोड की गई न ही इसे CDSCO और SEC की मंजूरी मिली है।

फर्मा कंपनी ने कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के बारे में खुलासा किया और कहा कि इसके नतीजे जुलाई में प्रकाशित होंगे और तब फर्म इस भारतीय वैक्सीन की लाइसेंस के लिए आवेदन करेगा। जनवरी में इसे कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल गई थी लेकिन तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजों को सार्वजनिक न किए जाने के कारण भारत बायोटेक को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।