प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र, कहा- गलतफहमी फैलाने वाले को मिले सख्त सजा

 


IMA ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी मदद, कहा- मामले में दें दखल

भारतीय चिकित्सा संघ की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया गया है कि उनकी याचिकाओं का समाधान करने के साथ मेडिकल पेशेवरों के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करें ताकि वे बिना किसी डर के काम कर सकें ।

 नई दिल्ली, एएनआइ। भारतीय चिकित्सा संघ ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  से लिखित तौर पर हस्तक्षेप की मांग की है। IMA ने प्रधानमंत्री को तीन पन्नों का पत्र लिख आग्रह किया कि उनकी याचिकाओं का समाधान करने के साथ ही मेडिकल पेशेवरों के लिए सौहाद्रपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करें ताकि वे बिना किसी डर के काम कर सकें IMA ने अपने पत्र में असम की घटना का जिक्र किया है जिसमें डॉक्टरों के खिलाफ शोषण का मामला है। इसमें अपील की गई है कि महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए चलाई जा रही वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर जो गलतफहमियां फैला रहे हैं उनके खिलाफ महामारी अधिनियम 1897 के तहत सरकार सख्त कार्रवाई करे। संघ ने 18 जून को 'नेशनल प्रोटेस्ट डे' के तौर पर आयोजित करने का फैसला लिया है।

IMA ने महामारी के मद्देनजर ऑक्सीजन व कोरोना वैक्सीनेशन के लिए प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। साथ ही संघ ने कहा कि सरकार के साथ महामारी से बचाव व इलाज में पहले दिन से साथ खड़े डॉक्टरों व चिकित्सा के खिलाफ कुछ लोगों द्वारा आपत्तिजनक बयान दिया जा रहा है। इससे मॉडर्न चिकित्सा के वैज्ञानिक प्रोटोकॉल आधारित सबूतों व वैक्सीनेशन को लेकर गलतफहमियां और दुष्प्रचार फैलाए जा रहे हैं जिसका लोगों पर गलत असर होगा।

जानें क्या है IMA की अपील

- लोगों को कोरोना संक्रमण की चिकित्सा से भटकाकर अंधविश्वासी तरीकों की ओर ले जाने की कोशिश करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो।

- ऑन ड्यूटी डॉक्टरों के शोषण व उनके खिलाफ हिंसा मामलों पर आरोपियों को 10 साल तक के कैद की सजा हो।

- कोविड-19 महामारी के दौरान अस्पताल में ऑन ड्यूटी डॉक्टरों का निधन होने पर उन्हें कोविड शहीदों के तौर पर सम्मानित किया जाए। उनके परिवारों को सरकार की ओर से सहायता दी जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने आग्रह में IMA ने कहा, ' अभी कोविड-19 महामारी की शुरुआत के पहले दिन से में पूरा मेडिकल समुदाय युद्ध स्तर पर डटा हुआ है और इसने लाखों लोगों की जान बचाई, घातक कोरोना वायरस के गंभीर संक्रमण से निजात दिलाया है। इस क्रम में सैंकड़ों डॉक्टरों को हमने खो दिया।' इस पत्र के शुरुआत में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए 1928 में IMA की शुरुआत का जिक्र किया गया है। भारतीय चिकित्सा संघ ने बताया है कि कोरोना की दूसरी लहर में पूरे देश में 513 डॉक्टरों की मृत्यु हुई है।

इस पत्र के शुरुआत में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए 1928 में IMA की शुरुआत का जिक्र किया गया है।इसके अनुसार, संघ की शुरुआत डॉक्टर के एस रे, डॉक्टर नील रतन सरकार, डॉक्टर बी सी रॉय, डॉक्टर एम ए अंसारी, कर्नल भोला नाथ, मेजर एमजी नायडू, डॉक्टर बीएन व्यास, डॉक्टर डी सिल्वा, डॉक्टर एनए घोष, डॉक्टर डीए चक्रवर्ती, डॉक्टर विश्वनाथन और कैप्टन बीवी मुखर्जी के साथ हुई जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी।