सरकारी सिस्टम के आगे भगवान भी हारे, आधार कार्ड न दिखा पाने पर मंदिर समिति ने लिया यह फैसला

 


बांदा में खुरहंड गांव स्थित राम जनकी मंदिर व परिसर

बांदा के रामजानकी मंदिर की 40 बीघे जमीन पर हुई गेहूं की पैदावार को अफसरों ने सरकारी दर पर बेचने से इन्कार कर दिया था। इन्कार के पीछे वजह बताई गई थी कि जिसके नाम मंदिर की जमीन होगी उसका आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा।

बांदा, [स्पेशल]।आखिरकार सरकारी सिस्टम के आगे भगवान हार ही गए। सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर अन्नदाता की परेशानियों के मामले तो अक्सर सामने आते हैं, लेकिन इस बार विधाता (भगवान) भी नियम-नीतियों के फेर में फंस गए। Aadhaar Card न होने की वजह से मंदिर की जमीन पर हुई फसल सरकारी क्रय केंद्र पर नहीं बिक पाई। यूं तो सरकारी तंत्र के आगे आम जनता अक्सर ही घुन की तरह पिसती है, लेकिन इस बार विधाता को पराजय का सामना करना पड़ा। अब ऐसा क्या और क्यों हुआ यह भी आपको बताते हैं: 

इस तरह हुआ पूरा वाकया: मामला खुरहंड गांव के रामजानकी मंदिर का है, जिसके 40 बीघे जमीन पर हुई गेहूं की पैदावार को अफसरों ने सरकारी दर पर बेचने से इन्कार कर दिया था। इन्कार के पीछे वजह बताई गई थी कि 'जिसके नाम मंदिर की जमीन होगी उसका आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा।' अप्रत्यक्ष रूप से भगवान के आधार कार्ड की मांग की गई थी। मंदिर समिति का कहना है कि जमीन भगवान राम और माता जानकी के नाम है। उनका आधार कहां से लाएं। मामला चर्चा में आने के बाद अब अधिकारियों का कहना है कि अगर मंदिर समिति अपने बटाईदारों को अधिकार दे तो उनका भी गेहूं क्रय किया जा सकता है। जिले के प्रभारी एवं कृषि शिक्षा राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत कह रहे हैं कि सर्वराकार (देखरेख करने वाले ) यानी कर्ता-धर्ता भी मंदिर की पैदावार बेच सकता है।

औने-पौने दाम में बेचा गेहूं: महंत का कहना है कि इसके पहले धान की लगभग 150 क्विंटल उपज खुरहंड स्थित विपणन धान खरीद केंद्र में बिक्री हुई थी। इस बार मजबूर होकर आठ जून को 61 क्विंटल गेहूं 1700 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खुले बाजार में बेचा है। महंत की इस इस बात से स्पष्ट होता है कि सरकारी सिस्टम के आगे विधाता भी हार गए। 

मठ मंदिरों की जमीनों की फसल बेचने में नहीं कोई दिक्कत: उरई में लगभग एक हजार बीघा जमीन मंदिरों के नाम है। इन जमीनों में उत्पादित होने वाली फसल को बेचने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। खतौनी में सर्वराकार का नाम दर्ज होने की वजह से आसानी से गेहूं बेचा जा सकता है। जिले में सिमिरिया में रामजानकी मंदिर में दौ सौ बीघा जमीन इसमें लगी हुई है। ठड़ेश्वरी मंदिर में पचास बीघा के लगभग जमीन होगी। महंत सिद्धराम दास के अनुसार किसी तरह की समस्या गेहूं बेचने में नहीं आती है। वहीं जिले की अपर जिलाधिकारी पूनम निगम कहती हैं कि मंदिरों की जमीनों पर पैदा होने वाली फसल को सर्वराकार बेच सकता है। उसके नाम का आधार कार्ड होता है। फसल बेचने में कोई खास दिक्कत नहीं आती है। 

जरा इनकी भी सुनिए: 

  • धार्मिक स्थल के सर्वराकार का नाम खतौनी में दर्ज होना जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन के गेहूं खरीद नहीं हो सकती है। आधार कार्ड मांगे जाने की बात एसडीएम से पूछी गई थी। उन्होंने आधार मांगने की बात से इन्कार किया। - लाखन सिंह राजपूत, कृषि शिक्षा राज्यमंत्री
  • क्रय नीति के तहत मंदिर-ट्रस्ट की फसल बिक्री नहीं हो सकती है, उनके बटाईदार अपने हिस्से की फसल की बिक्री ऑनलाइन पंजीकरण के बाद कर सकते हैं। - समीर शुक्ला, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी अतर्रा
  • मंदिर-मठ की जमीन की पैदावार को बंटाईदार के रूप में बेचा जा सकता है। यही एकमात्र व्यवस्था है। इसके लिए मंदिर का संचालक अधिकृत कर सकता है।   - संतोष बहादुर सिंह, एडीएम बांदा
  • मंदिर/ट्रस्ट की उपज की बिक्री सरकारी क्रय केंद्र में होने का प्रविधान नहीं है। प्रभारी मंत्री की बात मेरे संज्ञान में नहीं है। - सौरभ शुक्ला एसडीएम अतर्रा