पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लगाई चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर पूर्ण रोक

 


पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर पूर्ण रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने यूटी पावर मैन यूनियन की अर्जी पर कहा कि 28 मई को जारी उसके आदेश में चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर पूर्ण रोक का आदेश है।

 चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर पूर्ण रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने यूटी पावर मैन यूनियन की अर्जी पर कहा कि 28 मई को जारी उसके आदेश में चंडीगढ़ बिजली विभाग के निजीकरण पर पर पूर्ण रोक का आदेश है। गत दिवस हाई कोर्ट ने यह स्पष्टीकरण यूटी पावरमैन यूनियन द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया।

यूटी पावरमैन यूनियन ने अर्जी दायर कर कहा था कि 28 मई को पिछली सुनवाई पर हाई कोर्ट ने जो रोक लगाई थी वह स्पष्ट नहीं थी कि वह रोक निजीकरण प्रक्रिया पर लगाई गई थी या 19 अप्रैल को चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग विभाग के सचिव द्वारा सिर्फ ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति किए जाने के लिए गए निर्णय पर। लिहाजा, 28 मई के आदेश स्पष्ट किए जाएं।

हाई कोर्ट ने इस पर अपने आदेश स्पष्ट करते हुए साफ़ कर दिया कि रोक निजीकरण की प्रकिया पर ही लगाई गई है। इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। वहीं, इस पर चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसल पंकज जैन ने कहा कि प्रशासन इस आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही चुनौती देगा।

बता दें. कि यूटी पावरमैन यूनियन द्वारा चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका पर 1 दिसंबर को रोक लगा दी थी। जिसके बाद प्रशासन ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को हाई कोर्ट के रोक के आदेशों पर ही रोक लगा दी थी और हाई कोर्ट को इस मामले का 3 महीनों में निपटारा करने के आदेश दे दिए थे।

इसके बाद यूनियन ने 24 मई को हाई कोर्ट में अर्जी दायर कर विभाग के निजीकरण को लेकर आगे किसी भी किस्म की कार्यवाही पर रोक लगाए जाने की मांग कर दी थी और कहा था कि जब तक हाई कोर्ट इस याचिका का निपटारा नहीं करता है, तब तक प्रशासन आगे कोई कार्रवाई न करे। प्रशासन ने इसी का फायदा उठाते हुए अब बिजली विभाग ने निजीकरण के काम में तेजी ला दी है।

यूटी पावर मैन यूनियन ने कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में आदेश दिए थे कि इस मामले का तीन महीनों में निपटारा किया जाए, लेकिन उन आदेशों के अनुसार अब तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है, ऐसे में अब प्रशासन को इस मामले में आगे किसी भी किस्म की कार्यवाही पर रोक लगानी चाहिए। हाई कोर्ट ने एक बार फिर बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक लगा दी है।