आओ बचाएं नीम नदीः हापुड़ में ऋषि दत्तात्रेय की तपोस्थली से बहेगी नीम नदी

 


मंडलायुक्त ने किया नदी पर श्रमदान: फोटो- जागरण

नीम नदी से ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचे इसके लिए नीर फाउंडेशन ने एक माडल तैयार किया है। उसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। नदी में जगह-जगह चेक डैम बनेंगे। इससे सारा पानी आगे नहीं बहकर जा पाएगा।

हापुड़ । जब मंडलायुक्त ने नीम नदी के उद्गम स्थल पर नदी को पुनर्जीवित करने के लिए फावड़ा चलाया तो पूरी कायनात नदी को अविरल बहाने के प्रयास में जुट गई। राजनेता से लेकर अधिकारी, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं, छात्र-छात्राएं, ग्राम प्रधानों की टोली को जहां जिसे जो काम दिखा लग गया। चाहे पौधारोपने की बात रही हो या फिर नदी में खोदाई की। सबने कमान संभाल ली। हर कोई इस ऐतिहासिक दिन में अपना नाम दर्ज कराना चाहता था। सभी की इच्छा थी कि वह भी आने वाली पीढ़ी को नीम नदी के पुनर्जीवन के किस्से कहानी सुना सकें। वह इस बात को बता सकें कि उन्होंने भी नीम नदी के पुनर्जीवन देने के लिए काम किया था। अब वह दिन दूर नहीं जब नीम नदी एक बार फिर कल-कल करती अविरल बहेगी।

इस बरसात में ही नीम नदी अपने पुराने अस्तित्व को पा जाएगी। ऐसा विश्वास अब लोगों में जग गया। इस नदी से से लगे तीन जिलों के सैंकड़ों गांवों का भूजल स्तर ऊंचा होगा। यह नदी उन गांवों की जीवन रेखा बनेगी। नदी के गांव के साथ करीब एक किमी तक के गांव इससे लाभांवित होंगे।

नीम नदी से ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचे इसके लिए नीर फाउंडेशन ने एक माडल तैयार किया है। उसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। नदी में जगह-जगह चेक डैम बनेंगे। इससे सारा पानी आगे नहीं बहकर जा पाएगा। नदी में पानी कम होने पर चेक डैम पर रुक जाएगा और वहां भूजल स्तर को ऊंचा करता रहेगा। इसके साथ ही नदी के किनारे सघन वन लगाने की भी तैयारी की जा रही है। इससे पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ ही पक्षियों को आश्रय भी मिल सकेगा। तरह-तरह के पक्षी आसमान में विचरते नजर आएंगे।

एक मार्च 2021 को जब दैनिक जागरण ने नीर फाउंडेशन के साथ मिलकर नीम नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया था, तो हालत यह थी कि नीम नदी पर पंचायत करने के लिए लोग आने के लिए तैयार नहीं हुए। गांव दत्तियाना के रहने वाले सुभाष त्यागी को जब यह जानकारी मिली तो वह कुछ लोगों के साथ उद्गम स्थल पर पहुंचे। बाद में गांव के कुछ लोग और भी पंचायत में पहुंच गए। सभी ने माना कि नदी को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। इससे गांव के साथ दूसरों का भी भला होगा।

इस पर सभी ने सहमति जताई। स्थिति यहां तक थी कि नदी के साइफन तक ट्रेक्टर ट्राली में सवार होकर जाना पड़ा था, क्योंकि वहां तक कार का जाना संभव नहीं था। अब जब सभी कार्य अपनी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। तो नीम नदी को पुनर्जीवन देने से जुड़े लोगों में खुशी का ठिकाना नहीं है। सभी आनंदित हैं कि उनके प्रयास से क्षेत्र का एक बड़ा काम होने जा रहा है।

सिंचाई विभाग ने योजना तैयार की है कि नीम नदी 12 महीने बहे इसके लिए नदी में राजवाहा का अतिरिक्त पानी नदी में डाला जाएगा। इससे नदी गर्मी, सर्दी और बरसात में भी बहेगी। इससे जहां लोग नदी के किनारे खेतों की भी सिंचाई कर सकेंगे। इससे भूजल दोहन से भी बचा जा सकेगा।

नीम नदी के बारे में यह भी जानें

नीम नदी तीन जिलों से होकर गुजरती है। इसका उद्गम हापुड़ जिले के दत्तियाना गांव में है। यह एेतिहासिक गांव है। बताया जाता है कि यह ऋषि दत्तात्रेय की तपोस्थली रही है। उन्हीं के नाम पर गांव का नाम भी दत्तियाना पड़ा है। यह नदी दत्तियाना से राजवाहा के साथ होते हुए साइफन के जरिए राजवाहा को पार करती है। यह नदी हापुड़ जिले के 14 गावों से होकर गुजरते हुए बुलंदशहर जिले में पहुंच जाती है।

हापुड़ में इसकी लंबाई 14.2 किमी, 134 किमी बुलंदशहर में और 40 किमी अलीगढ़ में है। अलीगढ़ में यह नदी काली नदी में जाकर मिलती है। जो बाद में गंगा में जाकर विलय हो जाती है। यह एक एेसी नदी है जिसमें जीरो प्रतिशत प्रदूषण है और यह काली नदी की सहायक होने के कारण उसके प्रदूषण को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यहां से होकर गुजरती हैं नीम नदी

जिला हापुड़

नदी क्षेत्रः-14 किमी

दतियाना में नीम नदी का उद्गम स्थल है। यहां से हिम्मतपुर, राजपुर, सिखैड़ा, नया बांस, हाजीपुर, मुरादपुर, सैना, बंगौली और दरियापुर होते हुए नदी खुराना गांव पहुंचती है

जिला बुलंदशहर

नदी क्षेत्रः-134 किमी

बांहपुर से बुलंदशहर जिले में नीम नदी प्रवेश करती है। यहां से बैनीपुर,डारौली, केशोपुर सठला, निखोव, नयाबांस, नया गांव देहरा, लड़ाना, चिंगरावठी, गिनौरा, ढलना, औगना, चटेरा, भदौरी, भदौरा, प्याना कलां, अमरगढ़, खदाना, लछोई, सांखनी, डूंगरा जाट, सलगमा, बझेड़ा, श्यौरामपुर, सूरतगढ़, रजापुर, मलकपुर, सौराला, डबका, भाटगढ़ी, चिंगावली, इंदौरा खेड़ा, कुतुबपुर खेड़िया, रामी कल्याणी,लेदर खेड़ा, बुरहानपुर खुर्द पहुंचती है।

जिला अलीगढ़

नदी क्षेत्रः-40 किमी

अतरौली तहसील के गांव मलहपुर से अलीगढ़ में प्रवेश करती है। कनकपुर, पनेहरा, नंगला बंजारा, खड़ौआ, आलमपुर, जिरौली, कासगंज होते हुए काली नदी में मिल जाती है।