कई रोगों के इलाज में रामबाण है बरगद का फल और बीज, जानिए इसके चमत्‍कारी फायदे


ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन वट सावित्री का व्रत।

 हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन वट सावित्री का व्रत किया जाता है। इस बार 10 जून को यह व्रत किया जाएगा। बरगद की छाल बीज और फल से शारीरिक कमजोरी और पित्त दोष दूर होती है।

मेरठ। बरगद के पेड़ को वट वृक्ष भी कहा जाता है। महिलाएं वट सावित्री की पूजा के दौरान बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं, और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन वट सावित्री का व्रत किया जाता है। इस बार 10 जून को यह व्रत किया जाएगा। इस बार

खास बात यह है कि इस दिन सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है।

ग्रहण काल में शुभ कार्यों में नहीं पड़ेगी बाधा

सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहरनाथ मंदिर की महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज का कहना है कि ग्रहण का समय दोपहर 1.42 से शाम 6.41 बजे तक है। लेकिन देश में ग्रहण दिखाई न देने के कारण इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, और न ही इससे किसी शुभ कार्य में बाधा आएगी। इसलिए महिलाएं व्रत और पूजन कर सकती हैं। लेकिन इस दिन दोपहर 2.10 से 3.47 बजे तक राहु काल होने की वजह से इस समय पूजन कार्य नहीं किया जा सकता।

बरगद की छाल और फल में भी है औषधीय गुण

आयुर्वेदाचार्य डा. ब्रजभूषण शर्मा बताते हैं कि बरगद का पेड़ जहां अधिक आक्सीजन देता है, वहीं इसकी छाल, फल, बीज और दूध भी कई रोगों के इलाज में काम आता है। इससे कफ, पित्त दोष, कान-नाक और बालों की समस्या को भी दूर किया जाता है। बरगद का फल खाने से शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है।

हम संकल्प लेते हैं कि...

हम सभी घर में कई प्रकार के पौधे लगाते हैं, जो घर की खूबसूरती भी बढ़ाते हैं। बरगद के पेड़ का विशेष महत्व है। इसके कई लाभ भी हैं। इसलिए इस बार

कालोनी के पार्क में बरगद का पौधा लगाने का फैसला किया गया है।

-निधि शर्मा, शास्त्रीनगर

बरगद का पेड़ हमें आक्सीजन तो देता ही है, इसके अन्य कई लाभ हैं। यह काफी बड़ा होता है और इसकी छाव भी काफी होती है। पर्यावरण सुरक्षा के लिए इस बार

वट सावित्री व्रत के दिन बरगद का पौधा जरूर लगाएंगे।

-मानसी, सुभाष नगर

वट सावित्री व्रत और पूजा तो हर साल करती हूं। इसके लिए पास के मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं। इस बार बरगद का पौधा घर के सामने मैदान में लगाएंगे।

-अनारो देवी, मेजर ध्यानचंद नगर