शरणार्थियों पर कोरोना वायरस का संकट: वैक्सीनेसन से हो रहे हैं वंचित, चिंतित हुआ संयुक्‍त राष्‍ट्र


वैक्सीनेसन से हो रहे हैं वंचित, चिंतित हुआ संयुक्‍त राष्‍ट्र । फाइल फोटो।

विश्व में अभियान के तौर पर वैक्सीनेशन का काम चल रहा है। ताकी कोरोना महामारी पर काबू पाया जा सके लेकिन इस अभियान में विस्थापन एक बड़ी समस्या के तौर पर सामने आ रहा है। जिससे टीकाकरण के काम पर प्रभाव पड़ रहा है।

जिनेवा, एजेंसी। पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना महामारी की चपेट में है। अब तक लाखों लोगों ने कोरोना के चलते अपनी जान गवाई है। विश्व में अभियान के तौर पर वैक्सीनेशन का काम चल रहा है। ताकी कोरोना महामारी पर काबू पाया जा सके, लेकिन इस अभियान में विस्थापन एक बड़ी समस्या के तौर पर सामने आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक जिस वक्त कोरोना महामारी अपने उच्चतम स्तर पर थी और सभी अंतरराष्ट्रिय बॉर्डर सील कर दिए गए थे। उस दौर में विश्व के अलग-अलग हिस्सों से करीब 30 लाख लोग विस्थापित हुए। विस्थापितों को लेकर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने चिंता जाहिर की है।

शरणार्थियों के टीकाकरण में बाधाएं

यूएनएचसीआर ने विस्थापितों की बढ़ती संख्या और उसके कारण वैक्सीनेशन पर प्रभाव को गंभीर समस्या के तौर पर बताया है। एजेंसी के मुताबिक शरणार्थियों के लिए कोविड-19 टीकाकरण को लेकर बहुत सी बाधाएं हैं। अभी तक सिर्फ 82.4 करोड़ विस्थापितों में से बहुत छोटे से हिस्से को ही वैक्सीन लगाई गई है। एजेंसी में पब्लिक हेल्थ सेक्शन के प्रमुख एन बर्टन ने गुरुवार को कहा कि, दुनिया भर में, हमने कोविड-19 टीकाकरण योजना में शरणार्थियों को पीछे नहीं छोड़ने के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता देखी है, लेकिन फिर भी टीकाकरण में बाधाएं बनी हुई हैं।

वैक्‍सीनेशन की छह बड़ी बाधाएं

1. जिस इलाके में विस्थापित रह रहे हैं, वहां से सेंटर बहुत दूर है।

2. वैक्सीनेशन के लिए पंजीकरण प्रणाली का कठिन होना।

3. विस्थापितों में स्थानीय भाषा के बारे में जानकारी का आभाव।

4. कई देशों में वैक्शीनेशन के लिए राष्ट्रीय प्रमाण पत्र अनिवार्य है, लेकिन रिफ्यूजियों के पास वो नहीं है।

5. शरणार्थियों के लिए टीकों की कीमत बहुत ज्यादा थी, जिस कारण उपलब्धता प्रभावित हुई।

6. टीकाकरण को लेकर जानकारी की कमी या सूचना का आभाव विस्थापित के लिए अधिक समस्याएं पैदा करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कुछ देशों के प्रयासों को सलाम किया है। जिनमें विशेष रूप से सर्बिया का उल्लेख है, जो सीधे शरणार्थी केंद्रों में टीके लाए और वहीं शरणार्थियों के लिए टीकाकरण पूरा किया। यूएनएचसीआर ने आशा व्यक्त की कि वैश्विक शरणार्थियों के 20 प्रतिशत का टीकाकरण करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाएंगे।