कोरोना वैक्सीनेशन से जुड़े सभी सवालों के यहां मिलेंगे जवाब, जानें- देश में फैल रहे मिथकों की सच्चाई

 


कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर फैल रहे मिथकों पर केंद्र ने पेश किए तथ्य

मंत्रालय ने बताया कि अबतक करीब 23.5 करोड़ टीके की डोज दी जा चुकी हैं जिनमें मौत का आंकड़ा 0.0002 फीसद है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि टीकाकरण के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है।

नई दिल्ली, एएनआइ। कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर देश में कई तरह के मिथक हैं। जैसे- कोरोना वैक्सीन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, आनलाइन रजिस्ट्रेशन के बिना टीकाकरण नहीं और ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण संबंधी सुविधाओं में कमी समेत कई ऐसी बातें हैं जिन्हें लेकर लोगों के मन में गलतफहमियां हैं। इन्हीं सब गलतफहमियों को दूर करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को तथ्य पेश किए। मंत्रालय ने बताया कि अबतक करीब 23.5 करोड़ टीके की डोज दी जा चुकी हैं, जिनमें मौत का आंकड़ा 0.0002 फीसद है।

मिथक 1- टीकाकरण सेवाओं का लाभ लेने के लिए आनलाइन रजिस्ट्रेशन या प्री बुकिंग अनिवार्य

तथ्य- मंत्रालय ने बताया कि टीकाकरण के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। 18 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई भी शख्स सीधे वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकता है और उसी दिन वैक्सीन भी ले सकता है। हालांकि यह स्लॉट की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

मिथक 2- ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन और पंजीकरण के लिए सुविधाएं सीमित हैं।

तथ्य- ग्रामीण इलाकों में रजिस्ट्रेशन की सुविधाओं को लेकर पहले भी कई बार चिंता जताई जा चुकी है। इस पर केंद्रीय मंत्रालय ने जानकारी दी कि ग्रामीण इलाकों में रजिस्ट्रेशन के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। लोग सीएससी के जरिए कोविन पर पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके अलावा हेल्थ वर्कर्स या आशा से आन-साइट रजिस्ट्रेशन करवाकर अपने नजदीकी टीकाकरण केंद्र पर वैक्सीन लगवाई जा सकती हैं। वहीं, हेल्पलाइन नंबर 1075 पर कॉल करके भी अपनी बुकिंग करवा सकते हैं।

मिथक 3- टीकाकरण अभियान में ग्रामीण इलाके शहरी इलाकों से पीछे हैं। दोनों इलाकों में डिजीटल विभाजन है।

तथ्य- देश में मौजूद कुल 1.03 लाख कोविड टीकाकरण केंद्रों (CVCs) में से 61,842 CVC- SHC, PHC और CHC (59.7 फीसद) ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए हैं। यहां पर लोग आनसाइट रजिस्ट्रेशन और टीकाकरण (एक मई, 2021 से 12 जून, 2021 तक) करवा सकते हैं। CoWIN पर अब तक वर्गीकृत 69,995 टीकाकरण केंद्रों में से 71 फीसद (49,883) केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।

मिथक 4- आदिवासी क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज का अभाव है

तथ्य- तीन जून, 2021 तक CoWIN पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आदिवासी जिलों में प्रति मिलियन जनसंख्या पर टीकाकरण राष्ट्रीय औसत से अधिक है। 176 आदिवासी जिलों में से 128 जिले टीकाकरण कवरेज को लेकर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासी जिलों में अधिक वॉक-इन टीकाकरण हो रहा है।

मिथक 5- कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे मामले देखे गए हैं जिनमें लोगों में वैक्सीन के गंभीर प्रतिकूल प्रभाव सामने आए हैं, जिसके बाद मौत की घटना भी देखी गई है।

तथ्य- मंत्रालय ने कहा कि ये रिपोर्ट्स अधूरी हैं जो सीमित जानकारियों के आधार पर पेश की गई हैं। टीकाकरण के बाद किसी भी मौत की वजह वैक्सीन नहीं मानी जा सकती है। जब तक कि AEFO समितियों की जांच में यह बात साबित ना हो जाए।

मिथक 6- कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टीकाकरण के बाद होने वाली 488 मौतें 16 जनवरी, 2021 और 7 जून, 2021 के दौरान कोविड के बाद की जटिलताओं से जुड़ी हैं।

तथ्य- इस पर मंत्रालय ने कहा कि देश में अब तक कोरोना वैक्सीन की 23.5 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं, जिनमें मौत का आंकड़ा 0.0002 फीसद है। कोरोना पॉजिटिव मामलों में मृत्यु की दर एक फीसद है और टीकाकरण इन मौतों को रोक सकता है। इस वजह से टीकाकरण के बाद मौत का जोखिम COVID-19 संक्रमण के कारण मौत के जोखिम की तुलना में नगण्य है।