राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय की ओर से उठाए गए सुधार वाले कदमों पर जारी की ई-बुकलेट

 

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राजनाथ सिंह ने साल 2020 में रक्षा मंत्रालय की ओर से किए गए प्रमुख सुधारों पर ई-बुकलेट जारी की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को साल 2020 में रक्षा मंत्रालय की ओर से किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डालते हुए 20 रिफॉर्म्स इन 2020 शीर्षक से एक ई-बुकलेट जारी की। रक्षा मंत्री ने ई-बुकलेट को रक्षा के क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को साल 2020 में रक्षा मंत्रालय की ओर से किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डालते हुए '20 रिफॉर्म्स इन 2020' शीर्षक से एक ई-बुकलेट जारी की। इस मौके पर अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने ई-बुकलेट को रक्षा के क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य पर देश का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तिका रक्षा क्षेत्र को मजबूत और अधिक कुशल बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में सरकार के संकल्प का प्रतिबिंब है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए सुधार आने वाले वक्‍त में भारत को रक्षा क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति केंद्र बना देंगे। यह ई-बुकलेट नीति परिवर्तन, नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से सशस्त्र बलों में आधुनिकीकरण लाने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा साल 2020 में किए गए सुधारों का एक संक्षिप्त अवलोकन है।

इस मौके पर रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद वाई नाइक, सीडीएस जनरल बिपिन रावत, नौसेनाध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, सचिव (भूतपूर्व सैनिक कल्याण) रविकांत, सचिव रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन डॉ जी सतीश रेड्डी और वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) संजीव मित्तल मौजूद थे।

उल्‍लेखनीय है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बीते शुक्रवार को बैठक हुई थी। इस बैठक में भारतीय नौसेना की समुद्री सैन्य ताकत में बड़े इजाफे के लिए रक्षा मंत्रालय ने 43,000 करोड़ रुपये की लागत से छह अत्याधुनिक पनडुब्बी निर्माण की परियोजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी। चीन की लगातार बढ़ रही नौसैनिक क्षमता के मद्देनजर भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफे के लिहाज से इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

इसके साथ ही डीएसी ने करीब 6,000 करोड़ रुपये की लागत से सेना के एयर डिफेंस गन सिस्टम के आधुनिकीकरण के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई थी। मौजूदा वक्‍त में वैश्विक सुरक्षा रणनीति में सेनाओं की क्षमता और ताकत की लगातार बढ़ रही भूमिकाओं को देखते हुए भविष्य की तैयारियों को इसी हिसाब से नया स्वरूप दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि नए फैसले से सेनाओं की जरूरत पूरा करने के लिए आयात पर भारत की निर्भरता भविष्य में कम होगी और आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।