इसरो ने विकसित किए तीन प्रकार के वेंटिलेटर, तकनीक भी देगा

 

ISRO ने विकसित किए तीन प्रकार के वेंटिलेटर, तकनीक भी देगा

इसरो के इन वेंटिलेटर के नाम- प्राण वायु और स्वस्त। ये वेंटिलेटर आसानी से कहीं भी ले जाए सकते हैं तथा इनकी कीमत भी कम है। प्राण (प्रोग्रामेबल रेसपाइटरी असिस्टेंस फार द नीडी एड) वेंटिलेटर आटोमेटेड कंप्रेशन द्वारा रोगी को सांस लेने वाली गैस पहुंचाने के लिए है।

बेंगलुरु, प्रेट्र। कोरोना महामारी से लड़ाई में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी आगे आया है और उसने तीन प्रकार के वेंटिलेटर विकसित किए हैं। वह इन वेंटिलेटर की तकनीक उद्योग जगत को साझा करने को तैयार है ताकि महामारी के खिलाफ लड़ाई में और बेहतर तैयारी की जा सके। तकनीक लेने के लिए इसरो ने 15 जून के पहले उद्योग जगत से आवेदन मांगे हैं।

इसरो ने अपने इन वेंटिलेटर के नाम दिए हैं- प्राण, वायु और स्वस्त। ये वेंटिलेटर आसानी से कहीं भी ले जाए सकते हैं तथा इनकी कीमत भी कम है। प्राण (प्रोग्रामेबल रेसपाइटरी असिस्टेंस फार द नीडी एड) वेंटिलेटर आटोमेटेड कंप्रेशन द्वारा रोगी को सांस लेने वाली गैस पहुंचाने के लिए है। वायु (वेंटिलेटर असिस्ट यूनिट) कम लागत वाला वेंटिलेटर है जबकि गैस संचालित स्वस्त (स्पेस वेंटिलेटर एडेड सिस्टम फार ट्रामा असिस्टेंस) को बिजली के बिना काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम, एयरवे प्रेसर सेंसर, फ्लो सेंसर, आक्सीजन सेंसर, सर्वो एक्चुएटर के साथ पीप यानी पाजिटिव इंड इक्सपारेटरी प्रेसर कंट्रोल वाल्व लगा हुआ है।इसरो की वेबसाइट में दी गई जानकारी के मुताबिक चिकित्सक टच स्क्रीन कंट्रोल पैनल के द्वारा फ्लो निर्धारित कर मरीज को आवश्यकतानुसार आक्सीजन दे सकते हैं। सबसे अच्छी बात है कि इनमें पावर बैकअप भी दिया गया है ताकि बिजली चले जाने पर भी काम करते रहें। वेबसाइट में कहा गया है कि ये वेंटिलेटर भिन्न -भिन्न स्थितियों में मैनुअल के साथ-साथ मैकेनिकल भी आपरेट किए जा सकते हैं।

इन किफायती वेंटिलेटर का प्रोटोटाइप तिरुअंनतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) ने तैयार किया है। विभिन्न चरणों में इसरो में इनका परीक्षण और मूल्यांकन किया गया और ये सभी मानकों में खरे उतरे हैं। इसरो ने कहा कि उद्योग जगत को चिकि त्सीय उपयोग में लाने के पहले भारत सरकार से आवश्यक अनुमति पत्र लेना होगा।