मध्य प्रदेश : एम्फोटेरिसिन-बी के इंजेक्शन से ब्लैक फंगस के मरीजों की तबियत बिगड़ी, अस्पताल में मची हड़बड़ी


अस्पताल में भर्ती 42 में से 27 लोगों को दिया गया इंजेक्शन

मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ उमेश पटेल ने कहा वर्तमान में 42 मरीज बीएमसी के म्यूकोर्मिकोसिस वार्ड में भर्ती हैं। इनमें से 27 रोगियों को एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन दिए गए थे। इसके बाद इनमें बुखार कंपकंपी और उल्टी जैसी शिकायतें होने लगीं।

सागर, एएनआइ। मध्य प्रदेश के सागर जिले में ब्लैक फंगस मरीजों में एम्फोटेरिसिन-बी के शॉट दिए जाने के बाद कुछ प्रतिकूल प्रतिक्रिया की शिकायत सामने आई है। यहां जिले के सरकारी बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में भर्ती 27 मरीजों को एम्फोटेरिसिन-बी का इंजेक्शन दिया गया, जिसके बाद उनमें इसका कुछ प्रतिकूल असर देखने को मिला है। इनमें हल्का बुखार, कंपकंपी और उल्टी की शिकायत देखने को मिली है, जिसके बाद फंगस के इलाज में अहम दवा एम्फोटेरिसिन-बी के इस्तेमाल पर तत्काल मेडिकल कॉलेज में रोक लगा दी गई।

मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ उमेश पटेल ने कहा, 'वर्तमान में, 42 मरीज बीएमसी के म्यूकोर्मिकोसिस (mucormycosis) वार्ड में भर्ती हैं। इनमें से 27 रोगियों को एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन दिए गए थे। इंजेक्शन लगने के बाद, रोगियों को हल्का बुखार, कंपकंपी और उल्टी जैसी शिकायतें होने लगी। घटना के तुरंत बाद इंजेक्शन का उपयोग बंद कर दिया गया।' हालांकि पटेल ने कहा कि सभी मरीजों की हालत स्थिर है और डरने की कोई बात नहीं है।

उन्होंने कहा, 'घटना के बाद बीएमसी अधीक्षक और डीन हरकत में आ गए और प्रभावित मरीजों का रोगसूचक उपचार तुरंत शुरू कर दिया गया। सभी मरीजों की हालत स्थिर है और डरने की जरूरत नहीं है।' पटेल ने कहा, 'मरीजों को एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के बदले दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। मरीजों का ध्यान रखा जा रहा है।' म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस एक फंगल इंफेक्शन है। वातावरण में उपस्थित फंगस के संपर्क में आने से लोग म्यूकोर्मिकोसिस की चपेट में आ जाते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, काटने, खरोंचने, जलने या किसी और वजह से शरीर में हुए जख्म के माध्यम से यह फंगस त्वचा में प्रवेश कर जाता है और इसके बाद यह त्वचा पर भी विकसित हो सकता है। इस बीमारी की चपेट में ज्यादातर वो लोग आ रहे हैं जो कोरोना संक्रमित हैं या संक्रमण से ठीक हो चुके हैं।

इसके अलावा मधुमेह के कारण जिन लोगों की इम्यूनिटी कम है उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। म्यूकोर्मिकोसिस या 'ब्लैक फंगस' के बढ़ते मामलों को देखते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि घातक बीमारी के इलाज के लिए प्रमुख दवा एम्फोटेरिसिन-बी की उपलब्धता अब बढ़ाई जा रही है और मंत्रालय पांच अतिरिक्त निर्माताओं के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने इसे महामारी रोग अधिनियम के तहत एक सूचित रोग घोषित किया है, जिससे राज्य को हर म्यूकोर्मिकोसिस मामले की रिपोर्ट सरकार को करना अनिवार्य हो गया है।