खोरी गांव में भूमाफिया का दिया कब्जा ही रजिस्ट्री मान लेते हैं लोग


Aravalli News: खोरी गांव में भूमाफिया का दिया कब्जा ही रजिस्ट्री मान लेते हैं लोग

बस्ती में लोगों के पास अपने कच्चे-पक्के मकानों के मालिकाना हक में कुछ दिखाने को नहीं है। हां कब्जा बताने के लिए इनके पास मतदाता सूची में नाम आधार कार्ड बिजली का बिल राशन कार्ड और उनके पते पर आने वाली पुरानी डाक हैं।

नई दिल्ली/फरीदाबाद , सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और दिल्ली की सीमा पर बसे खोरी गांव राजस्व क्षेत्र की 100 एकड़ भूमि से छह सप्ताह में अतिक्रमण हटाने का फैसला दिया है। सोमवार को आए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में अभी सिर्फ हरियाणा वन विभाग की जमीन खाली कराने का आदेश हुआ है, मगर इस क्षेत्र में इससे भी ज्यादा दिल्ली सरकार की जमीन पर इसी तरह का कब्जा है। वन विभाग की यह जमीन पंजाब भू- संरक्षण अधिनियम-1900 की धारा चार और पांच के तहत संरक्षित है। इसके तहत इस जमीन पर गैर वानिकी कार्य नहीं हो सकता। बावजूद यहां भू-माफिया द्वारा दिया गया कब्जा ही लोग रजिस्ट्री मान लेते हैं। यहां तोड़फोड़ के नाम पर अब तक शासन-प्रशासन की तरफ से कई बार प्रयास हो चुके हैं मगर ये महज खानापूíत के लिए ही होते हैं। इस क्षेत्र में करीब पांच हजार कच्चे-पक्के मकान हैं। यहां करीब 20 हजार की आबादी है। ज्यादातर (90फीसद) आबादी एक समुदाय विशेष की है।

पांच सितारा होटल के बराबर से है बस्ती में जाने का रास्ता

हरियाणा में सूरजकुंड-दिल्ली मार्ग पर एक पांच सितारा होटल के पीछे बसी इस बस्ती में जाने का रास्ता भी इसी होटल के बराबर से है। इस बस्ती में अंदर जाने के बाद यह पता नहीं चलता कि कब हरियाणा की सीमा खत्म हो गई और दिल्ली की सीमा शुरू हो गई। बस्ती में लोगों के पास अपने कच्चे-पक्के मकानों के मालिकाना हक में कुछ दिखाने को नहीं है। हां, कब्जा बताने के लिए इनके पास मतदाता सूची में नाम, आधार कार्ड, बिजली का बिल, राशन कार्ड और उनके पते पर आने वाली पुरानी डाक हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसके चलते ही हरियाणा सरकार से बिजली कनेक्शन और राशन कार्ड का विवरण भी यह फैसला सुनाने से पहले मांगा था। कोर्ट वन क्षेत्र खाली करने से पहले इन कब्जाधारियों की यह मांग भी ठुकरा चुका है कि उन्हें वैकल्पिक जगह दे दी जाए।

रवि सिंगला (सेवानिवृत्त, वरिष्ठ नगर योजनाकार, नगर निगम, फरीदाबाद) का कहना है किमैंने फरीदाबाद नगर निगम में बतौर तहसीलदार 2009 से 2013 के बीच में 12 भू-माफिया पर पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई थी। मेरे सेवानिवृत्त होने तक इन पर कोर्ट में केस चल रहा था। ये एफआइआर तब एक वीडियो क्लिप के आधार पर दर्ज कराई गई थी, जिसमें भू-माफिया जमीन का कब्जा को ही रजिस्ट्री बताते हुए लोगों से पैसे ले रहे थे। तब यहां यह माफिया जमीन का कब्जा तीन हजार रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से देता था।