अरविंद केजरीवाल ने लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी, 'राष्ट्रहित के कामों में मैंने आपका साथ दिया

 


अरविंद केजरीवाल ने लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी

सीएम केजरीवाल ने पत्र में पीएम मोदी से अपील करते हुए लिखा है कृपया घर-घर राशन योजना दिल्ली में लागू करने दीजिए। आज तक राष्ट्रहित के सभी कामों में मैंने आपका साथ दिया है राष्ट्रहित के इस काम में आप भी हमारा साथ दीजिए।

नई दिल्ली । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी। यह चिट्ठी घर-घर राशन योजना के मुद्दे पर लिखी गई है। पत्र में सीएम केजरीवाल ने पीएम मोदी से अपील करते हुए लिखा है 'कृपया घर-घर राशन योजना दिल्ली में लागू करने दीजिए। आज तक राष्ट्रहित के सभी कामों में मैंने आपका साथ दिया है, राष्ट्रहित के इस काम में आप भी हमारा साथ दीजिए'।

इस पत्र के माध्यम से केजरीवाल ने घर-घर राशन योजना को पूरे देश में लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में यह योजना पूरे देश में लागू हो। केंद्र सरकार इस योजना में जो बदलाव करवाना चाहती है हम वो करने के लिए तैयार हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री केजरीवाल ने रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी से राशन की होम डिलीवरी (डोर स्टेप डिलीवरी) योजना पर लगी रोक को हटाने की अपील की थी। सीएम ने कहा कि राशन को हर गरीब आदमी के घर तक पहुंचाने की सारी तैयारी हो चुकी थी। अगले सप्ताह योजना शुरू होनी थी, लेकिन इस पर रोक लगा दी गई। उन्होंने सवाल किया कि जब लोगों के घर पिज्जा और बर्गर की होम डिलीवरी हो सकती है, तो गरीब लोगों के घर राशन की होम डिलीवरी क्यों नहीं हो सकती?

केजरीवाल सरकार का आरोप केंद्र ने योजना पर लगाई रोक

दरअसल केंद्र सरकार ने केजरीवाल सरकार की महत्वाकांक्षी ‘घर-घर राशन योजना’ (डोर स्टेप डिलीवरी) पर अभी हाल में ही रोक लगा दी थी। यह योजना एक हफ्ते बाद लागू होनी थी। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा है कि इस योजना के लिए उसकी मंजूरी नहीं ली गई है। इसलिए इस पर रोक लगाई गई है।

बता दें कि इससे पहले राशन योजना के नाम को लेकर भी केंद्र सरकार ने आपत्ति जताते हुए था कि यह योजना केंद्र की योजना नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत आती है। इसमें कोई भी बदलाव केवल संसद कर सकती है, न कि राज्य। इसलिए दिल्ली सरकार इस योजना का न तो नाम बदल सकती है और न ही इसको किसी और के साथ जोड़ सकती है। केजरीवाल सरकार इस योजना को 25 मार्च को लागू करना चाह रही थी, लेकिन केंद्र की आपत्ति के कारण यह संभव नही हो पाया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने इस योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन’ योजना से बदलकर ‘घर-घर राशन’ योजना रख दिया था।