शुरुआती तेजी के बाद धीमा पड़ा वरिष्ठ नागरिकों का टीकाकरण, जानें इसकी क्‍या है वजहें


सबसे ज्यादा जोखिम वाले समूह यानी 60 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण सुस्त पड़ गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा जोखिम वाले समूह यानी 60 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण सुस्त पड़ गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इसकी कई वजहें हैं।

नई दिल्ली, पीटीआइ। कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा जोखिम वाले समूह यानी 60 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण सुस्त पड़ गया है। हालांकि, इसकी शुरुआत बहुत तेज हुई थी और ऐसा लग रहा था कि जल्द ही इस समूह के सभी लोगों का टीकाकरण कर लिया जाएगा। परंतु, पिछले कुछ हफ्तों से इनका टीकाकरण धीमा पड़ गया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इसकी कई वजहें हैं, जिनमें इनका आवागमन, भ्रामक सूचना और वैक्सीन को लेकर बेबुनियाद अफवाहें प्रमुख हैं।

6.71 करोड़ को लगी पहली डोज

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 60 साल से अधिक उम्र के 6.71 करोड़ लोगों को कोरोना रोधी वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है। इनमें से 2.29 करोड़ लोगों को दूसरी डोज भी दी जा चुकी है। 2021 में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी 14.3 करोड़ होने का अनुमान है। इस हिसाब से अभी इस उम्र के सिर्फ 16 फीसद लोगों को ही दोनों डोज लगाई जा सकी है।

कम होता गया आंकड़ा

कोरोना महामारी के खिलाफ टीकाकरण के तीसरे चरण में एक मार्च से 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के साथ ही 45-60 वर्ष आयुवर्ग के गंभीर रोगों से ग्रस्त लोगों का टीकाकरण शुरू किया गया था। इसी चरण से सरकारी और निजी टीकाकरण केंद्रों पर टीके लगाए जाने लगे थे। 13 मार्च से दो अप्रैल के दौरान 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को हर हफ्ते औसतन 88.77 लाख डोज लगाई गईं। परंतु, पांच जून से 25 जून के दौरान यह आंकड़ा प्रति सप्ताह औसतन 32 लाख पर आ गया।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने वरिष्ठ नागरिकों के टीकाकरण में सुस्ती को लेकर चिंता जताई है। इनका कहना है कि यह वर्ग कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा जोखिम वाले वर्गो में शामिल है।

वैक्सीन को लेकर मिथक बड़ी बाधा

कोलिशन फार फूड एंड न्यूट्रिशन सिक्योरिटी (सीएफएनएस) के कार्यकारी निदेशक डा. सुजीत रंजन कहते हैं कि कोरोना टीकों के बारे में मिथक, भ्रांतियां और अफवाहें टीकाकरण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। कुछ लोग सोचते हैं कि वो कभी संक्रमित नहीं होंगे, तो कुछ सोचते हैं कि संक्रमण अपने आप खत्म हो जाएगा।

अविश्वास भी एक वजह

वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित वैक्सीन को लेकर तर्कहीन अविश्वास भी टीकाकरण में बड़ी रूकावट है। गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल के डाक्टर पीयूष गोयल मानते हैं कि वैक्सीन को लेकर हिचक से भी ज्यादा लोग टीका लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।