आठ चीनी नागरिकों ने बनाया था ठगी के लिए फर्जी एप, ऐसे आरोपितों तक पहुंची साइबर सेल


चीनी दूतावास व विदेश मंत्रालय के जरिये चीनी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की कोशिश करेगी पुलिस

पुलिस का कहना है कि चीनी नागरिकों ने सुनियोजित तरीके से भारतीयों को ठगने की योजना बनाई थी। इसके लिए कुछ चीनी नागरिक कई महीने पहले भारत आए थे। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए साइबर सेल चीनी दूतावास व विदेश मंत्रालय से सहयोग लेगी।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने ठगी के एक मामले का भंडाफोड़ कर देश के खिलाफ रची जा रही चीन के एक बड़े साजिश से पर्दा उठाया है। यह साजिश लाखों भारतीयों को आर्थिक रूप से खोखला कर रहा था। अप्रैल और मई में जब देश कोरेाना की दूसरी लहर से लड़ा रहा था तब फर्जी एप के जरिये चीन न केवल लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा था बल्कि उनके डाटा को भी चोरी किया जा रहा था। साइबर सेल द्वारा पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ व एप की जांच कि बाद पता चला कि चीन में बैठे आठ चीनी नागरिकों ने यह एप बनाया था। पुलिस ने उनकी पहचान कर ली। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए साइबर सेल चीनी दूतावास व विदेश मंत्रालय से सहयोग लेगी।

पुलिस का कहना है कि चीनी नागरिकों ने सुनियोजित तरीके से भारतीयों को ठगने की योजना बनाई थी। इसके लिए कुछ चीनी नागरिक कई महीने पहले भारत आए थे। चीनी नागरिक पकड़े गए दोनों सीए अविक केडिया और रौनक बंसल से मिले थे और ठगी करने की पूरी साजिश रचने के बाद वापस अपने देश लौट गए थे। इनमें अधिकतर महिलाएं थी। योजनानुसार दोनों सीए ने आरोपितों के लिए 110 फर्जी कंपनियां बनाई ।

इन कंपनियों को आरोपितों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, व अन्य लोगाें के नाम पर पंजीकृत किया। कंपनी बनने के बाद दोनों सीए इन कंपनियों को चीनी नागरिकों को दो से तीन लाख रुपये में बेच देते थे। चूकि इन कंपनियों से जुड़े बैंक खाते भी फर्जी होते थे। ये सभी आनलाइन पैसा भेजने की माध्यमों से जुड़े होते थे। ऐसे में एप पर निवेश किए गए पैसों को बहुत आसानी से इन कंपनियों के जरिये चीन में बैठे ठगों के पास पहुंचाया जाता था। इन कंपनियों के संचालन के लिए चीनी नागरिक भारतीय लोगों को ठगी में भागीदार बनाने थे। उन्हें मोटी रकम महीने के हिसाब से देते थे।

साइबर सेल में खोली चीनी नागरिकों की पोल

इस बड़े पैमाने पर घोटाले के पीछे मुख्य चीनी संचालक, वाटस एप और टेलीग्राम जैसे विभिन्न एप पर लोगों से संपर्क करते थे और फर्जी बैंक खातों , शेल कंपनियों को बनाने, एप को प्रसारित करने और बढ़ावा देने, पैसे ट्रांसफर करने आदि के लिए भारतीयों को रखते थे। आरोपितों ने आनलाइन एप का एक लिंक प्रसारित किया जो बहु-स्तरीय मार्केटिंग माडल के आधार पर आकर्षक रिटर्न का वादा करके बड़ी संख्या में लोगों को धोखा देता है। इस साजिश की आड़ में आरोपित पीड़ितों का डाटा भी चुराते थे।

जालसाजों द्वारा बड़ी संख्या में ऐसे एप प्रसारित किए गए हैं, जिनमें पावर बैंक, ईज़कॉइन, सन फैक्ट्री, लाइटनिंग पावर बैंक आदि शामिल हैं। इनमें से कुछ एप को गूगल प्ले स्टोर ने बैंन कर दिया था। इनमें से अधिकांश एप का प्रसार यू ट्यूब , टेलीग्राम चैनल, वाटस एप चैट लिंक व एसएमएस के जरिय किया गया ।

जब पीड़ित एप पर पंजीकृत हो जाता है, तो उसे बहुत अधिक रिटर्न अर्जित करने के लिए बार-बार पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। एप में शामिल होने के लिए पीड़ित को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को आमंत्रित करने के लिए भी प्रेरित किया जाता था।

चीनी नागरिकों ने इस धोखाधड़ी के पीड़ितों से एकत्र किए पैसों को लूटने के लिए देशभर में अपना नेटवर्क स्थापित किया। इसके लिए उन्हाेंने विभिन्न शहरों में चार्टर्ड एकाउंटेंट, बैंक खाता धारक, फर्जी कंपनियों के निदेशक आदि को मोटी रकम देकर नियुक्त किया। पश्चिम बंगाल, एनसीआर, बेंगलुरु, ओडिशा, असम और सूरत में एप से जुड़े कई लोगों की पहचान की गई है।