रूस से बात करने का प्रस्‍ताव ईयू ने ठुकराया, मास्‍को ने जताया अफसोस, कहा हम अब भी इच्‍छुक

 


रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन भी चाहते हैं ईयू से वार्ता

यूरोपीय संघ के रूस से वार्ता का प्रस्‍ताव ठुकराने पर क्रेमलिन ने अफसोस जताया है। क्रेमलिन प्रवक्‍ता ने कहा है कि वो अब भी इसके इच्‍छुक हैं। वार्ता के इस प्रस्‍ताव को फ्रांंस और जर्मनी ने दिया था।

मास्‍को (रॉयटर्स)। मास्‍को ने यूरोपीय संघ के उस फैसले पर अफसोस जताया है जिसमें ईयू को रूस से संबंधों को तनाव रहित और मजबूत बनाने के लिए शिखर सम्‍मेलन का प्रस्‍ताव दिया गया था। ये प्रस्‍तान यूरोप के सबसे बड़े राष्‍ट्र जर्मनी और फ्रांस की तरफ से दिया था। क्रेमलिन से जारी बयान में कहा गया है कि राष्‍ट्रपति पुतिन इस शिखर वार्ता के लिए अब भी इच्‍छुक हैं। वो चाहते हैं तनाव को कम करने के लिए ब्रसेल्‍स्‍ से बातचीत की जानी चाहिए। क्रेमलिन के प्रवक्‍ता ने ईयू के फैसले पर कहा कि वो अब तक इसको लेकर अनिश्चिता के माहौल में हैं और फैसला नहीं ले पा रहे हैं।

आपको बता दें कि मास्‍को ने जर्मनी और फ्रांस के बातचीत के प्रस्‍ताव को सहर्ष स्‍वीकारते हुए कहा था कि इसकी काफी जरूरत है। क्रेमलिन की तरफ से ये भी कहा गया था कि तनाव को कम करने का ये एक बेहतर जरिया है। गुरुवार को ही मास्‍को ने पोलेंड और बाल्टिक राज्‍यों से शिखरवार्ता के संबंध में पुतिन ने वार्ता की थी।

जहां तक मास्‍को से वार्ता की बात है तो लिथुवानिया इसके पक्ष में नहीं है। गुरुवार को भी लिथुवानिया के राष्‍ट्रपति ने कहा था कि रूस से बातचीत करते हुए उसकी नीति को लेकर सावधान होने की जरूरत है। लिथुवानिया के राष्‍ट्रपति ने ये भी कहा था कि ये बातचीत कुछ ऐसी है जैसे किसी भालू को शहद की रखवाली के लिए बिठा दिया जाए।

आपको बता दें कि रूसी राजनेता एलेक्‍सी नवलनी को जहर देने के मामले से ईयू और रूस के संबंध काफी खराब हुए हैं। आपको ये भी बता दे कि जर्मनी रूस का सबसे बड़ा उपभोक्‍ता है। यूं भी यूरोप में काफी कुछ रूस से ही जाता है। हाल के कुछ समय में तनावपूर्ण होते माहौल में भी व्‍यापारिक संबंधों में कमी नहीं आई है।