असम में डॉक्टर की पिटाई मामले में NHRC ने मांगी रिपोर्ट, चार हफ्ते में कार्रवाई को कहा

 


NHRC ने असम सरकार से पूछताछ को कहा, 4 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी।(फोटो: दैनिक जागरण)

अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने असम सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख से होजई में एक चिकित्सा सुविधा में एक डॉक्टर पर कथित हमले की जांच करने और मामले में जरूरी निवारक और दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा है।

नई दिल्ली, प्रेट्र। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने असम सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख से होजई जिले में एक कोविड सेंटर पर डाक्टर पर जानलेवा हमले की जांच करने, और दंडात्मक कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट चार हफ्ते में देने का आदेश दिया है। यह जानकारी सरकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को दी।उन्होंने बताया कि एनएचआरसी ने इस मामले का संज्ञान लेने के बाद गुरुवार को कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार आयोग ने कहा कि इस मामले में शिकायत की एक-एक प्रति राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को प्रेषित की जाए। मामले में आवश्यक, निवारक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस कार्रवाई की रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर आयोग को भेजी जाए।उल्लेखनीय डाक्टर सेउज कुमार सेनापतिकी पिटाई का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें महिलाओं सहित कई लोग हमला करते दिख रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमें घटना के संबंध में दो जून को शिकायती पत्र मिला था। एनएचआरसी ने मामले का संज्ञान लेकर असम सरकार से रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने इस सिलसिले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया है।

CJI रमना ने की अदालतों को आधुनिक बनाने की वकालत

महामारी के दौरान अदालतों के कामकाज की समीक्षा के लिए विभिन्न हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के साथ पहली वर्चुअल मीटिंग में सीजेआइ एनवी रमना के सामने अदालतों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का विषय उठा। इस पर सीजेआइ रमना ने अदालतों को आधुनिक बनाने की पुरजोर वकालत की। सीजेआइ व मुख्य न्यायाधीशों के बीच वर्चुअल मीटिंग एक व दो जून को हुई थी।सीजेआइ रमना ने नेशनल ज्यूडिशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन की स्थापना का सुझाव दिया, जो अदालती परिसर को आधुनिक बनाए।उन्होंने कहा कि देशभर में अदालतों में स्थायी तौर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा होनी चाहिए। इस दौरान सीजेआइ रमना ने विभिन्न हाई कोर्ट में खाली पदों को भरने पर भी जोर दिया। न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध पहली मई के आंकड़ों के अनुसार, देश के 25 उच्च न्यायालयों में जजों के कुल स्वीकृत पद 1,080 हैं, लेकिन अभी इनमें मात्र 660 जज नियुक्त हैं और 420 पद रिक्त हैं।