विवाद के बावजूद दो कांग्रेस विधायकों के बेटों को नौकरी देगी पंजाब सरकार, बाजवा का भतीजा अब डीएसपी नहीं बनेगा SI


पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की फाइल फोटो।

विवाद के बावजूद पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार कांग्रेस के दो विधायकों को नौकरी देगी। इस बीच यह बात सामने आ रही है कि विधायक फतेह जंग बाजवा के बेटे को डीएसपी नहीं बल्किसब इंस्‍पेक्‍टर बनाया जाएगा। राकेश पांडे के पुत्र को नायब तहसीलदार बनाया जाएगा।

चंडीगढ़। विवादाें के बावजूद पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार कांग्रेस के दो विधायकों के बेटे फतेह जंग बाजवा और राकेश पांडे के बेटों को सरकार सरकारी नौकरी में एडजस्ट करेगी। इस संबंध में आज को होने वाली बैठक में एजेंडा लाया जा रहा है। फतेह जंग बाजवा सांसद प्रताप‍ सिंह बाजवा के भाई हैं। बताया जा रहा है कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रताप सिंह बाजवा के भतीजे कंवर प्रताप सिंह बाजवा को डीएसपी नहीं बल्कि सब इंस्पेक्टर बनाया जा सकता है।

कंवर प्रताप को पहले डीएसपी बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन राजनीतिक विवाद के कारण मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने अपने फैसले पर पुनः विचार किया है। इसी प्रकार लुधियाना से कांग्रेस के विधायक राकेश पांडे के बेटे दुष्यंत पांडे को नायब तहसीलदार लगाने की तैयारी है। पहले दुष्यंत को तहसीलदार लगाने का प्रस्ताव था।

काबिले गौर है कि फतेहजंग बाजवा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मुखर रहे प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई हैं। खुद फतेह भी कैप्टन के खिलाफ मोर्चा खोले रखते थे लेकिन आजकल शांत हैं। राकेश पांडे सबसे सीनियर विधायक होने के बावजूद कैबिनेट में जगह नहीं पा सके। पिछले कार्यकाल के दौरान जब बीबी राजिंदर कौर भट्ठल ने कैप्टन के खिलाफ बगावत की थी तो पांडे भट्ठल कैंप में रहे थे। अब भी वह कैप्टन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रखते हैं।

दोनों विधायकों फतेहजंग बाजवा और राकेश पांडे के पिता आतंकी हमलों में मारे गए थे। अब दया के आधार पर दिवंगत नेताओं के पोतों को नौकरी दी जा रही है। फतेहजंग बाजवा के पिता सतनाम सिंह बाजवा को 1987 में अमृतसर में और राकेश पांडे के पिता जोगिंदर पाल पांडे भी 1987 में ही लुधियाना में एक पैट्रोल पंप के पास आतंकी हमले का शिकार हो गए थे। हालांकि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा था कि बाजवा के पिता को सोने के तस्करों ने मारा था। उनकी हत्या आतंकवादियों ने नहीं की थी। पूर्व गृह मंत्री सुखबीर बादल ने यह दावा 1987 में दर्ज की गई एफआईआर के हवाले से किया था।