15 लाख की गाड़ी हो या 20 लाख की, चोरों के लिए सबकी कीमत मात्र पांच हजार


Jharkhand News चौपारण थाना में जब्त किए गए चोरी के वाहन। जागरण।

 चाहे 15 लाख के वाहन हों या 20 लाख के चोरों के लिए सबकी कीमत पांच हजार रुपये होती है। हजारीबाग पुलिस लाइन से चोरी गई स्कार्पियो का भी पांच हजार में सौदा किया था। चोरी के वाहनों को शराब की तस्करी में इस्तेमाल किया जाता है।

हजारीबाग। बिहार-झारखंड के वाहन चोरों की शराब माफिया से गठजोड़ है। अब तक शराब तस्करी में प्रयोग की जाने वाली जितनी भी गाड़‍ियां पकड़ी गई हैं, उनमें कई चोरी की हैं। 15 लाख की स्कार्पियो हो या 10 लाख की हुंडई की वेन्यू कार। चोरों की नजर में सभी की कीमत सिर्फ पांच हजार रुपये है। चोर हजारीबाग क्षेत्र से वाहनों को उड़ाने के बाद पांच हजार रुपये में ही इसका सौदा करते थे। चोरी के इन वाहनों का इस्तेमाल अवैध शराब की तस्करी के लिए किया जाता था।

हाल के दिनों में वाहन चोरों के गिरोह के पुलिस गिरफ्त में आने के बाद यह जानकारी सामने आई है। यहां तक कि पुलिस लाइन से इस वर्ष फरवरी माह में चोरी गई दो दारोगा की स्कार्पियो एस 10 को भी चोरों ने पांच हजार रुपये में बिहार के बक्सर में बेच दिया था। इसमें एक स्कार्पियो आरटीओ कार्यालय में एक कर्मी के पास से बरामद हुई। पुलिस ने इस मामले में 10 अपराधियों को गिरफ्तार किया था।

दारोगा के वाहन से भी ढोई जा रही थी शराब

वाहन चोरी मामले में बिहार से हाल में गिरफ्तार 10 अपराधियों के पास से हजारीबाग के पुलिस लाइन से गायब दो स्कार्पियो के अलावा चार वाहन बरामद किए गए थे। इनमें दारोगा के वाहनों के अलावा एक अन्य बोलेरो से शराब की तस्करी की जा रही थी। झारखंड से हजारीबाग व गिरिडीह क्षेत्र से शराब बिहार भेजी जा रही थी। बिहार में शराबबंदी के बाद से झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध शराब की तस्करी बढ़ गई है।

कहीं चोरी-छिपे और कई जगह पुलिस की मिलीभगत से शराब माफिया झारखंड से अवैध शराब ले जाकर बिहार में ऊंची कीमत पर बेचते हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि अब शराब तस्कर वाहनों की चोरी का ठेका देने लगे हैं। वहीं वाहन चोर भी सीधे शराब तस्करों से संपर्क रख रहे हैं। चोरी गए वाहनों को कौड़ी के भाव इन शराब तस्करों को बेच दिया जाता है।

बक्सर के शैलेस मिश्रा, धमेंद्र चौधरी और चंद्रजीत कुमार को बेची गई थी कार

पुलिस लाइन से चोरी गए वाहन समेत अन्य वाहनों को मधुबन धनबाद के बिटु सोनार, मणिहार मुजफ्फरपुर के मो. मुकीम और मुजफ्फरपुर के ही रविंद्र कुमार ने वीरकुंवर सिंह काॅलोनी बक्सर के शैलेश मिश्रा, मोहनिया भभुआ के चंद्रजीत कुमार व बक्सर के धमेंद्र चौधरी को बेचते थे। प्रति गाड़ी हर चोर को पांच-पांच हजार रुपये मिलते थे। पुलिस के समक्ष आरोपितों ने बताया कि बिहार के गिरोह के सदस्य शराब तस्करी के लिए ये गाड़‍ियां उपलब्ध कराते थे। वाहनों के फर्जी कागजात भी बनवाए जाते थे। पुलिस की दो स्कार्पियो चोरी मामले में छह जुलाई को 10 आरोपितों को हजारीबाग पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

'पुलिस लाइन से चोरी गए वाहनों का शराब तस्करी में इस्तेमाल हो रहा था। जांच में यह बात सामने आई थी। बेहद कम दाम में इन वाहनों का सौदा भी तस्करों के साथ किया गया था।' -कार्तिक एस, एसपी हजारीबाग।