15 सालों से इंडस्ट्री में सब कॉमेडी ही कर रहे हैं, ख़ुशक़िस्मत हूं अलग किरदार मिले- राजपाल यादव

 


Rajpal Yadav and Hungama 2 poster. Photo- Instagram

2003 में आयी हंगामा में राजपाल ने प्रियदर्शन के साथ पहली बार काम किया और इसके बाद गरम मसाला मालामाल वीकली चुपचुप के जैसी कई यादगार फ़िल्मों में काम किया। अब राजपाल प्रियदर्शन निर्देशित हंगामा 2 में एक बार फिर अपनी कॉमेडी से गुदगुदाने वाले हैं।

 नई दिल्ली। राजपाल यादव ने पुरानी सदी की विदाई के साथ हिंदी सिनेमा में अभिनय करियर की शुरुआत की थी। 2000 में आयी रामगोपाल वर्मा की जंगल में नेगेटिव किरदार ने उन्हें चर्चा में ला दिया, मगर राजपाल यादव को व्यापक पहचान मिली उनके कॉमिक कैरेक्टर्स के लिए।

2003 में आयी हंगामा में राजपाल ने प्रियदर्शन के साथ पहली बार काम किया और इसके बाद गरम मसाला, मालामाल वीकली, चुपचुप के जैसी कई यादगार फ़िल्मों में काम किया। अब राजपाल प्रियदर्शन निर्देशित हंगामा 2 में एक बार फिर अपनी कॉमेडी से गुदगुदाने वाले हैं। यह फ़िल्म 23 जुलाई को डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज़ हो रही है। पेश हैं राजपाल यादव की जागरण डॉटकॉम के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत के ख़ास अंश। 

प्रियदर्शन के साथ आप एक बार फिर जुड़े हैं। बतौर निर्देशक उनमें क्या बदलाव पाते हैं? 

कहते हैं कि प्रकृति 24 घंटे में 24 बार रंग बदलती है। पिछले 20 साल से दुनिया में भी हर रोज़ बदलाव हुए हैं। बेस किसी का नहीं बदलता, लेकिन शेष सबका बदलना चाहिए और शेष बदलने में प्रियन जी (प्रियदर्शन) एकदम अलग व्यक्तित्व और अलग कृतित्व लगे हमें।उनके साथ काम करके बड़ा मज़ा आया। हंगामा 2 एक अलग फ़िल्म है। हंगामा 2003 की फ़िल्म थी, हंगामा 2 फ़िल्म 2021 में रिलीज़ हो रही है। उस फ़िल्म को ख़ूब आशीर्वाद मिला था। अब हंगामा 2 को भी प्यार मिले, हमारे निर्देशक प्रियदर्शन जी ने कलाकारों के बीच ऐसी कैमिस्ट्री बिठाने की कोशिश की है

पैनडेमिक ने मनोरंजन इंडस्ट्री में बहुत कुछ बदल दिया है। आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं?

यह ऐसी आपदा है, जिसने पूरे विश्व को 360 डिग्री पर मोड़ दिया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से आप गांव में भी पहुंच पा रहे हैं और संसार के सब देशों में पहुंच पा रहे हैं। जो भी हालात हैं, उन्हें मैं सहृदय स्वीकार करता हूं।इस दौरान सिनेमा बिज़नेस विविध आयामी हुआ है। प्रोजेक्ट चाहे 100 करोड़ का हो या एक करोड़ का, ओटीटी के माध्यम से हर विषय को इज़्ज़त मिल रही है। कला जितनी बिखरती है, उतना निखरती है। अब हम सिनेमा हॉल से निकलकर देश में अंदर तक पहुंच गये हैं। मनोरंजन का क्षेत्र बहुत वृहद हो जाएगा। कला के अगले 10 साल मैं स्वर्णिम मानता हूं।

नौजवान पीढ़ी को अनुभव कम है, इसलिए कलाकारों की जो सीनियर जनरेशन है, उसके पास ख़ुद को बदलने के लिए टाइम है। हम लोगों की पीढ़ी के कलाकारो बहुत काम कर चुके हैं तो अब यंग जनरेशन के साथ जुड़कर काम करने का अच्छा मौक़ा है, क्योंकि हमारी पीढ़ी अभी-अभी डिजिटल वर्ल्ड में कूदी है। हम लोगों के लिए डिजिटल वर्ल्ड नया है। ये प्लेटफॉर्म 2000 के बाद की जितनी जनेरेशन के लिए जितने नये हैं, उतने ही पुरानी जनरेशन भी हैं। दोनों पीढ़ियों के लिए ही प्लेटफॉर्म है। मेरे हिसाब से यह बहुत बढ़िया सिचुएशन है। 

एडल्ट वेब सीरीज़ में काम नहीं करूंगा, लेकिन बच्चे, बूढ़े और नौजवान के लिए जो बिल्कुल स्वस्थ मनोरंजन देती हो, कोई गाली ना हो, सब लोग एक साथ देख सकें। कुछ वेब सीरीज़ के लिए हां कर दी है। 

आपको ऐसा नहीं लगता कि इंडस्ट्री आपके टैलेंट का पूरा फ़ायदा नहीं उठा सकी। आप कॉमिक किरदारों तक सीमित होकर रह गये?

पिछले 15 सालों में पूरी इंडस्ट्री में सिर्फ़ कॉमेडी फ़िल्में ही बनी हैं। चाहे किसी बैनर की हो। चाहे लीडिंग एंटरटेनर हो या सपोर्टिव एंटरटेनर या फिर कॉमिक एंटरटेनर... सब कॉमेडी ही कर रहे थे। मैं तो ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानता हूं कि 90 फीसदी किरदार अलग करने को मिले।

मालामाल वीकली, जंगल, चुप चुपके के वक़्त, मैं मेरी पत्नी और वो, मैं माधुरी दीक्षित, हंगामा... सब में मुझे अलग तरह के किरदार करने को मिले और अब हंगामा 2 का भी अलग कैरेक्टर है। देखिए, फिजीक को कोई कलाकार बदल नहीं कर सकता, लेकिन मानसिकता हर मिनट चेंज कर सकता है- 'इस जग में तन अनेक हैं, मन के भाव अनेक और तन-मन के इस खेल में सबका मालिक़ एक'- हमारे दद्दा जी कहते हैं। इसीलए, मुझे अलग-अलग मानसिकता वाले किरदार निभाने में बहुत सुख मिलता है।

बतौर एक्टर राजपाल यादव को किस तरह के किरदार और फ़िल्में पसंद हैं?

मुझे ऐसे किरदार पसंद हैं, जिनमें अपने चरित्र के माध्यम से जीवन जीने का मौक़ा मिले। वही फ़िल्में पसंद आती हैं, जिसमें जीवन हो। परिवार हो। संसार हो। बच्चे, बूढ़े नौजवान हों और सबके लिए मनोरंजन समान हो।(हंसते हुए) पिछले एक-सवा साल में हमने 360 फ़िल्में और कॉन्सेप्ट सुने हैं और जिनमें राजपाल फिट हैं, उनमें 3 दर्ज़न रोल निकालकर रखे हैं।

आपके अपने निभाये किरदारों में सबसे अधिक कौन-सा पसंद है?

कैरेक्टर बहुत किये हैं, जिन्होंने बहुत लोकप्रियता दिलवायी, उनमें छोटा डॉन है। किरदार की लम्बाई और जनता से मिले प्यार के हिसाब से देखें तो 'मैं मेरी पत्नी और वो' का मिथलेश करने का बहुत सुख मिला। भोपाल- अ प्रेयर फॉर रेन का कैरेक्टर दिलीप करने में भी बहुत आनंद मिला।

आपने अता पता लापता नाम से एक फ़िल्म का निर्देशन भी किया था। आगे निर्माण या निर्देशन की कोई योजना है?

आगे का अभी कुछ नहीं पता। हम लोग तो ऐसे हैं कि रोज़ क्रिकेट खेलते हैं और एक दिन फुटबॉल खेल ली। जीवन भर अभिनेता था, अभिनेता ही रहूंगा। लेकिन, कभी मन में हुड़क होती है तो कुछ अलग कर लेते हैं। हमने थिएटर में भी एक दो प्ले डायरेक्ट किये हैं। मैं तो फुटबाल खेलने के बाद भी अभिनेता ही हूं। डायरेक्शन करूंगा भी तो अभिनेता बनकर ही करूंगा, डायरेक्टर बनकर नहीं कर सकता।

फुटबॉल के साथ आपने राजनीतिक की हॉकी भी खेली है। यूपी के चुनाव आने वाले हैं। राजनीति में वापसी होगी क्या?

अभिनय के बाद मेरे लिए राजनीति सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म है, लेकिन मुझे यह चुनना पड़ेगा कि कौन सा सक्रिय भाव से करना है और कौन सा निष्क्रिय भाव से करना है? सक्रिय भाव बचपन से अभिनय रहा है। राजनीति भी 365 में से 360 दिन चाहती है और 24 घंटे में 36 घंटे चाहती है। अभिनय भी 24 घंटे में से 36 घंटे चाहता है। इसलिए मैं अभिनय में सक्रिय भाव से काम कर रहा हूं। लेकिन, कहीं ना कहीं अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति में अपनी सेवा देता रहता हूं, किसी भी प्लेटफॉर्म के माध्यम से।

सक्रिय राजनीति में ना पहले था और ना हूं और अभी कोई इरादा भी नहीं है। क्योंकि हमने पहले भी बोला कि जिस आदमी का सिलेक्शन हो जाए पूरे वर्ल्ड में, उसे इलेक्शन की ज़रूरत नहीं है। सेवा करने की कोशिश करूंगा। मगर 90 पर्सेंट अभिनय और 10 पर्सेंट सेवा। उसके लिए कभी पीछे नहीं हटा। मैं और अपने तरीक़े से करता रहता हूं।

मीज़ान के साथ काम करके अच्छा लगा। वो अनुशासित और संतुलित एक्टर हैं। मुझे लगता है कि मीज़ान का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उनमें कुछ करने की ललक है। हंगामा 2 में बहुत अच्छे एक्टर्स का गुच्छा है। आशुतोष राणा जी, परेश रावल जी, मनोज जोशी जी, जॉनी भाई, टीकू तलसानिया जी, शिल्पा जी, बहुत सारे अच्छे लोगों का कॉम्बिनेशन है। कॉमेडी ऑफ़ इरर्स है। फ़िल्म देखकर अगर थोड़ी देर के लिए आप अपनी मुसीबतें भूल जाते हैं तो हमें बहुत ख़ुशी होगी।