टीगरे में अकाल की चपेट में चार लाख लोग, 18 लाख अन्‍य लोगों पर भी मंडरा रहे संकट के बाद

न्‍यूयॉर्क (यूएन)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने इथियोपिया के हिंसा से ग्रस्‍त क्षेत्र टीगरे पर गहरी चिंता जताई है। उन्‍होंने कहा कि जल्‍द से जल्‍द यहां पर युद्ध विराम करने की जरूरत है जिससे यहां के प्रभावितों की मदद की जा सके। उन्‍होंने सभी पक्षों से शांति के लिए बातचीत का रास्‍ता इख्तियार करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि बातचीत से ही समस्‍या का राजनीतिक समाधान निकाला जाना चाहिए। गुटारेस ने ये भी कहा है कि यहां पर मौजूद विदेशी बलों की मौजूदगी भी वहां पर टकराव का बड़ा कारण बनी हुई है।

अपने एक बयान में गुटारेस ने सभी पक्षों से यहां पर बिना परेशानी मानवीय सहायता पहुंचाने की गारंटी देने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि नागरिकों के बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत से स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए यहां पर मानवीय आधार पर सहायता मुहैया करवाने के सभी मार्ग से बाधाओं को दूर करने की सख्‍त और तत्‍काल जरूरत है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि सहायताकर्मियों पर हमलों को भी भी किसी सूरत से ठीक नहीं ठहराया जा सकता है।टीगरे के मुद्दे पर एक ओपन मीटिंग में आपदा राहत संयोजक रमेश राजसिंघम ने कहा कि यहां पर करीब 4 लाख लोग अकाल के शिकार हैं। वहीं करीब 18 लाख अन्य लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं। यूएन की एक रिपोर्ट बताती है कि यहां पर हिंसा की वजह से करबी 17 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। इनमें से लगभग 60 हजार लोगों ने सूडान में शरण ली है। हिंसाग्रस्‍त इस क्षेत्र में सबसे अधिक मार महिलाओं और बच्‍चों पर पड़ी हे। यहां पर यौन और लैंगिक हिंसा की करीब 1200 घटनाएं दर्ज की गई हैं। आशंका ये भी जताई जा रही है कि इनकी असल संख्‍या इससे कहीं अधिक है।

राजसिंघम का यहां तक कहना है कि यहां के लोगों की जिंदगी इस बात पर निर्भर है कि उन्हें खाद्य सहायता, पोषण सामान, दवाएं और अन्य मानवीय सहायता कितनी जल्‍द मिल सकती है। गौरतलब है कि यहां पर करीब 8 महीने पहले यह संकट शुरू हुआ था। इस हिंसा के शुरू होने के बाद सुरक्षा परिषद की ये पहली जनरल मीटिाग थी। हालांकि इससे पहले भी इस मुद्दे पर बैठकें आयोजित की गई थीं, लेकिन वो क्‍लोज डोर मीटिंग थीं। आपको बता दें कि पिछले सप्‍ताह ही इथियोपिया में इकतरफा युद्धविराम लागू करने की घोषणा की गई थी। लेकिन टीगरे सुरक्षा सेना ने अभी इस युद्धविराम पर सहमति नहीं जताई है।