महामारी कोविड-19 से बचाव में कारगर है फ्लू का टीका, नए अध्ययन में निकला ये नतीीजा


कोरोना के गंभीर प्रभावों से बचा सकता है फ्लू का टीका

महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए संभावनाओं की तलाश में पहले से मौजूद फ्लू टीका भी काफी हद तक कारगर हो सकता है। इस बात का दावा करने वाले एक अध्ययन में 75 हजार कोरोना संक्रमितों के डाटा का विश्लेषण किया गया और यह बात सामने आई है।

 वाशिंगटन, प्रेट्र। कोरोना वायरस (कोविड-19) से जूझ रही दुनिया में इस घातक और जानलेवा संक्रमण से मुकाबले के लिए रिसर्च जारी है लेकिन मौजूदा दवाओं में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसी कवायद में पहले से मौजूद फ्लू टीके  को लेकर एक नया अध्ययन किया गया है। इसका दावा है कि यह टीका कोरोना संक्रमण के गंभीर प्रभावों से बचाव कर सकता है। बड़े पैमाने पर किए गए इस अध्ययन के अनुसार, इंफ्लुएंजा  के खिलाफ टीका लगवाने वाले लोग कोरोना के कुछ गंभीर प्रभावों से आंशिक तौर पर सुरक्षित हो सकते हैं।

75 हजार संक्रमितों पर हुआ अध्ययन

शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष करीब 75 हजार कोरोना संक्रमितों के डाटा के विश्लेषण के आधार पर निकाला है। उनका कहना है कि वार्षिक तौर पर फ्लू का टीका लगवाने वाले कोरोना पीड़ितों में स्ट्रोक, सेप्सिस और रक्त का थक्का बनने का खतरा कम पाया गया है। फ्लू के खिलाफ टीका लगवाने वाले ऐसे कोरोना मरीजों को आइसीयू में भर्ती करने की जरूरत भी कम देखी गई है।  अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर देविंदर सिंह  ने कहा, 'कोरोना महामारी  के दौर में अध्ययन का यह नतीजा बेहद अहम है। हमारा यह अध्ययन दुनिया भर में बीमारी के बढ़ते दबाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।'

फ्लू का टीका नहीं लेने वाले कोरोना संक्रमितों में आइसीयू में भर्ती होने का जोखिम अधिक 

शोधकर्ताओं के अनुसार, फ्लू का टीका नहीं लगवाने वाले कोरोना पीडि़तों को आइसीयू में भर्ती करने का खतरा 20 फीसद ज्यादा पाया गया है। इनमें स्ट्रोक का जोखिम 58 फीसद, सेप्सिस का खतरा 45 फीसद और रक्त का थक्का बनने का जोखिम 40 फीसद ज्यादा पाया गया है। कई हालिया अध्ययनों से भी यह बात सामने आ चुकी है कि फ्लू वैक्सीन कोरोना के खिलाफ सुरक्षा मुहैया करा सकती है।