दिल्ली पुलिस और किसानों की बीच बनी सहमति, 200 किसानों को मिली जंतर-मंतर तक जाने की इजाजत


तीन कृषि कानूनों को खत्म किए जाने की मांग को लेकर संसद भवन पर प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

दिल्ली की सीमाओं पर बैठे प्रदर्शनकारियों द्वारा मानसून सत्र के दौरान दिल्ली कूच करने के एलान पर दिल्ली पुलिस पहले से पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में न घुसने देने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

नई दिल्ली,  संवाददाता। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संसद के मानसून सत्र में जंतर मंतर पर जाकर प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच सहमति बन गई है। बीते तीन दिनों से इस मामले को लेकर किसान नेताओं और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर जारी था। सोमवार को सिंघु बार्डर पर हुई बैठक बेनतीजा रही थी। उसके बाद मंगलवार को फिर बैठक हुई।

बुधवार को फाइनल बैठक में दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सकी। अब ये तय किया गया है कि 200 किसान दिल्ली पुलिस की निगरानी में जंतर मंतर तक जाएंगे, वहां प्रदर्शन करेंगे और दिल्ली पुलिस की निगरानी में ही वापस आ जाएंगे। ये प्रदर्शन सुबह 10.30 बजे से शुरू होगा। किसानों के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर और आसपास के इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी है।

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दिल्ली की सीमाओं पर बैठे प्रदर्शनकारियों द्वारा मानसून सत्र के दौरान दिल्ली कूच करने के एलान पर दिल्ली पुलिस पहले से पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। प्रदर्शनकारियों को दिल्ली में न घुसने देने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। नई दिल्ली जिला को खासतौर पर पुलिस छावनी में तब्दील है।

दूसरी ओर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला मंगलवार को कृषि कानूनों के विरोध में यूपी गेट पर जारी धरने का समर्थन करने भी पहुंचे थे। उन्होंने राकेश टिकैत से मुलाकात कर हर परिस्थिति में साथ देने का वादा भी किया। साथ ही कहा कि पूरा देश इस प्रदर्शन के साथ है। प्रदर्शन का परिणाम जो भी हो लेकिन केंद्र सरकार जल्द ही गिरने वाली है। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ यूपी गेट पर बीते 28 नवंबर 2020 से प्रदर्शन जारी है। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश कृषि कानूनों के विरोध में खड़ा है। जहां भी देखो किसान परेशान हैं। मंडियों में उनका अनाज खरीदने वाला कोई नहीं। यही कारण है कि सरकार में सहभागी पार्टियां उनसे अलग हो रहीं हैं।

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कृषि कानूनों के विरोध में संसद भवन के बाहर धरना देने के मसले पर दिल्ली पुलिस व संयुक्त किसान मोर्चा के बीच मंगलवार को दूसरी बैठक भी बेनतीजा रही थी। सिंघु बार्डर के निकट एक रिसोर्ट में हुई बैठक में संसद की जगह किसी अन्य जगह पर धरना देने व उसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या कम करने के पुलिस के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी। बैहालांकि नेताओं ने यह भी कहा कि बैठक में पुलिस ने जो बातें कहीं हैं, उन बातों पर मोर्चा की बैठक में विचार किया जाएगा। इसी बैठक में ये भी तय किया गया था कि पुलिस की ओर से दिए गए सुझाव पर भी विचार किया जाएगा, इसी के तहत ये चीजें तय की गई।

गौरतलब है कि पुलिस व संयुक्त मोर्चा के बीच पहली बैठक रविवार को हुई थी। गणतंत्र दिवस को ट्रैक्टर परेड के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राजधानी में उपद्रव मचाया था। ऐसे में पुलिस नहीं चाहती है कि फिर से वही हालात पैदा हों। यही कारण है कि पुलिस ने कोरोना नियमों का हवाला देकर संयुक्त किसान मोर्चा को संसद के बाहर धरना देने की अनुमति नहीं दे रही थी और धरना स्थल को लेकर अन्य विकल्प दिया था।