जम्मू-कश्मीर में परिसीमन से पहले 2011 के सेंसस पर गर्मा रही राजनीति, कुछ ऐसा कहा भाजपा और नेशनल कांफ्रेंस ने


जनगणना के आंकड़ों में कश्मीर में जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धि इसका सबूत है कि गड़बड़ हुई है।

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सीटों के परिसीमन को लेकर कार्रवाई के चलते संभाग में राजनीति जोर पकड़ने लगी है। भाजपा यहां 2011 की जनगणना में आंकड़ों से छेड़छाड़ का मुद्दा बना रही है तो वहीं इन आरोपाें को बेबुनियाद करार देने वाली नेशनल कांफ्रेंस भी मैदान में है।

जम्मू, राज्य ब्यूरो । जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सीटों के परिसीमन को लेकर कार्रवाई के चलते संभाग में राजनीति जोर पकड़ने लगी है। भाजपा यहां 2011 की जनगणना में आंकड़ों से छेड़छाड़ का मुद्दा बना रही है तो वहीं इन आरोपाें को बेबुनियाद करार देने वाली नेशनल कांफ्रेंस भी मैदान में है। प्रदेश भाजपा ने गत दिनों जम्मू में परिसीमन आयोग से बैठक के दौरान जम्मू कश्मीर में हुई जनगणना के आंकड़ों को फर्जी बताया था। पार्टी का आरोप है कि कश्मीर को राजनीतिक फायदा देने के लिए जनगणना के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर ही होना। ऐसे में इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज होने लगी है। नेशनल कांफ्रेंस के प्रांतीय प्रधान देवेन्द्र सिंह राणा ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों से छेड़छाड़ के भाजपा के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। राणा का कहना है कि भाजपा साबित करे कि जनगणना के आंकड़े सही नही है।राणा का कहना है कि 2011 के बाद मतगणना नही हुई है। ऐसे में दस साल पहले हुई जनगणना के आधार पर ही परिसीमन होगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आयोग निष्पक्ष तरीके से अपना काम करेगा।

वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री कविन्द्र गुप्ता का कहना है कि कश्मीर के दलों ने राजनीतिक फायदे लेने की सियासत की है। यही कारण है कि जम्मू की राजनीतिक आकांक्षाओं को नजरअंदाज किया गया। गुप्ता का कहना है कि जनगणना के आंकड़ों में कश्मीर में जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धि इसका सबूत है कि गड़बड़ हुई है।

सवालों के घेरे में रहने वाले सेंसस के आधार पर परिसीमन को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभविक है। राजनीतिक दलों के साथ जम्मू में सभ्य द्वारा भी 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सेवानिवृत कर्नल विरेन्द्र कुमार साही का कहना है कि 2011 की जनगणना में धांधली हुई है। फर्जी आंकड़ों के आधार पर होने वाला परिसीमन भी सवालों के घेरे में रहेगा। उनका कहना है कि परिसीमन 2021 के सेंसस के बाद होने से ही जम्मू संभाग को इंसाफ मिलेगा।